बाड़मेर कांग्रेस कार्यालय को आवंटित जमीन पर सोमवार को हाईकोर्ट से स्टे मिल गया। कोर्ट ने आदेश में लिखा कि नगर परिषद 10 अप्रैल को जारी किए नोटिस पर अगली सुनवाई होने तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की विवादित भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा का कहना है कि हाईकोर्ट ने हमारी याचिका को सुनते हुए हमें स्टे दिया है। जिला कांग्रेस को मिला है 1999.90 वर्ग मीटर जमीन का पट्टा
नगर परिषद ने कांग्रेस को 1999.90 वर्ग मीटर जमीन का पट्टा दिया है। लेकिन जमीन के पट्टे और मौके पर मौजूद स्थिति में जमीन के आकार में अंतर आ रहा है। आवंटित जमीन के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का दावा है कि जमीन उनकी है। इस बीच शिकायतों के बाद नगर परिषद ने 10 अप्रैल को एक नोटिस जारी करते हुए लिखा था कि आवंटित जमीन से संबंधित कई शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच प्रक्रियाधीन है। ऐसे में निर्माण कार्य को रोकने के लिए 6 अप्रैल को नोटिस दिया था, लेकिन उसके बाद से ही लगातार निर्माण कार्य चल रहा है। शुक्रवार(10 अप्रैल) को 2 घंटे में निर्माण कार्य को हटाने के निर्देश देते हुए पूरे निर्माण को ध्वस्त करने की चेतावनी दी गई थी। यूआईटी सचिव को सौंपी गई है जांच
कांग्रेस कमेटी आवंटित जमीन पर धरने पर बैठ गई और जिला प्रशासन की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच यूआईटी सचिव को दी गई है। वो इस सप्ताह में कलेक्टर को जांच रिपोर्ट सौपेंगे। हालांकि जिला कांग्रेस कमेटी ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि चारदीवारी का निर्माण भवन निर्माण के समान नहीं है, इसलिए नोटिस उचित नहीं है। याचिकाकर्ता को आशंका है कि उसकी ओर से बनाई चार दीवारी को तोड़ा जा सकता है।
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