शिक्षा नगरी कोटा के प्रवास पर आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कोचिंग संस्कृति, छात्र आत्महत्या और गौसेवा जैसे मुद्दों पर तीखे और स्पष्ट विचार रखे। उन्होंने कहा कि केवल मोटिवेशन देने से छात्रों पर स्थायी प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि उन्हें असफलता से जूझने की ताकत भी सिखानी होगी। कोटा में उन्होंने कहा कि जो कोचिंग संस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की गारंटी देकर बच्चों को आकर्षित करते हैं, उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि असफल होने पर जीवन कैसे संभालना है। अगर किसी कोचिंग संस्थान का छात्र असफल होकर आत्महत्या करता है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। आपने सफलता का सपना तो दिखाया, उससे पैसा इकटठा कर लिया लेकिन असफलता से लड़ने का साहस नहीं सिखाया। जब आप सफलता का भरोसा देकर बच्चों को बुलाते हो तो उन्हें अलग से क्लास लेकर ये भी समझाओं कि एक असफलता से जीवन समाप्त नहीं होता। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि छात्रों को यह समझाना जरूरी है कि एक बार की असफलता जीवन का अंत नहीं होती। इतिहास ऐसे अनेक उदाहरणों से भरा है, जहां लोग बार-बार असफल होकर सफल हुए और आज उनकी कहानियां प्रेरणा बन चुकी हैं। गाय को मां कहने में क्या दिक्क्त
उन्होंने गौ संवर्धन पर बात करते हुए कहा कि आज सरकारे गौ सेवा के नाम पर बातें करती है लेकिन गाय को माता नहीं कहा जा रहा है। जब संस्कृति, धर्म में गाय को माता माना गया है तो सरकारों को कहने में दिक्कत क्या है। गाय को आज भी पशु की सूची में क्यों रखा गया है। हर सनातनी परिवार में आज भी पहली रोटी गौमाता के लिए निकाली जाती है, जो हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक भाव का प्रतीक है। ऐसे में गौमाता को केवल एक पशु की श्रेणी में रखना हमारी परंपरा और आस्था के विपरीत है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि गौमाता को पशुओं की सूची से हटाकर माता के रूप में विशेष दर्जा दिया जाए, जिससे उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस एवं प्रभावी कानून बनाए जा सकें। गलत को गलत और सही को सही कहना होगा
इस दौरान उन्होंने ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच हुए युद्ध और देशों में तनाव के मुददे पर कहा कि आज देशों में तनाव के हालात है युद्ध हो रहे है। हर कोई अपने आप को सही बता रहा है। ऐसे समय में विद्वान कहां है जो सही को सही और गलत को गलत कह सके। सभी देश अपने आप को सही बताने में लगे हुए हैं और इसी का नतीजा है कि युद्ध हो रहे हैं। 81 दिन तक निकालेंगे यात्रा
कोटा प्रवास के दौरान उन्होंने बताया कि राजस्थान में गौसेवकों द्वारा किए जा रहे कामों को देखने वे यहां आए हैं। उन्होंने बताया कि 3 मई से गोरखपुर से गविष्ठी यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा, जिसका उद्देश्य गौमाता की रक्षा, संवर्धन तथा उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिएजनजागरण करना है। यह यात्रा 81 दिन तक चलेगी और इस दौरान शंकराचार्य खुद उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभाओं में जाएंगे और व्यापक स्तर पर समाज को इस अभियान से जोड़ा जाएगा और आगामी चुनाव में गौ रक्षा के लिए मतदान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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