जोधपुर के रातानाडा स्थित गणेश मंदिर के पास बेशकीमती सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले में ड्रोन सर्वे के पुराने निर्देशों की पालना नहीं होने से नाराज हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने प्रशासन की सुस्ती पर गहरी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 18 मई तक पूर्व निर्देशों की पालना नहीं हुई, तो जोधपुर कलेक्टर और जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा। 9 महीने बाद भी प्रशासन की रिपोर्ट ‘शून्य’ यह मामला रातानाडा निवासी भारत सांखला की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। रातानाडा गणेश मंदिर के पास खसरा नंबर 480 और 780/425 की जमीन, जो राजस्व रिकॉर्ड में ‘गैर मुमकिन भाखर’ और ‘गैर मुमकिन नाडी’ के रूप में दर्ज है, उस पर हुए अवैध कब्जों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान जब सरकारी वकीलों ने फिर से समय मांगा तो कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि 14 जुलाई 2025 को दिए गए आदेश की पालना अब तक न होने का कोई भी उचित कारण नजर नहीं आता। कोर्ट ने इसे प्रशासन की टालमटोल मानते हुए न्यायहित में अनुपालना के लिए एक आखिरी अवसर दिया है। अफसरों पर लटकी व्यक्तिगत पेशी की तलवार सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ मेवाड़ा उपस्थित हुए। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एन.एस. राजपुरोहित की टीम से कंचन जोधा और अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.एल. भाटी की टीम से दीपक चांडक ने पक्ष रखा। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ लिखा है कि यदि अगली सुनवाई तक आवश्यक अनुपालना रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो जिला कलेक्टर और जेडीए कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर देरी का कारण स्पष्ट करना होगा। क्या था जुलाई 2025 का मूल निर्देश? इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 9 महीने पहले, 14 जुलाई 2025 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने प्रशासन को कड़े निर्देश दिए थे। कोर्ट ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिया था कि वे दो सप्ताह के भीतर राजस्व और सेटलमेंट विभाग की एक संयुक्त टीम गठित करें। इस टीम को ड्रोन और अन्य आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से पूरी जमीन का सर्वे करना था। अतिक्रमणकारियों और पट्टों की मांगी थी पूरी कुंडली हाईकोर्ट ने प्रशासन से इस सर्वे के जरिए अतिक्रमण करने वालों की पूरी सूची, वहां खड़े किए गए अवैध निर्माणों का विवरण और खुद राज्य सरकार द्वारा वहां कितना निर्माण कराया गया है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह था कि यदि इन अतिक्रमणकारियों में से किसी को प्रशासन द्वारा ‘पट्टे’ जारी किए गए हैं, तो उनके नाम अलग से रिपोर्ट में अंकित किए जाएं। 9 महीने बीत जाने के बाद भी यह रिपोर्ट पेश न करना कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।
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