रेल कनेक्टिविटी में पिछड़ा झुंझुनूं:यात्रियों को वेटिंग और महंगे सफर की मजबूरी, दिल्ली-जयपुर के लिए सीमित ट्रेनें, बड़े शहरों से सीधा जुड़ाव नहीं




जिला रेल सेवाओं के मामले में आज भी पिछड़ा हुआ है। जिले से बड़ी संख्या में सैनिक, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं, लेकिन आवागमन के लिए उन्हें पर्याप्त रेल सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। झुंझुनू से दिल्ली के लिए केवल दो ट्रेनें संचालित होती हैं, जिनमें से एक ही नियमित है, जबकि दूसरी सप्ताह में केवल दो दिन (बुधवार व शुक्रवार) चलती है। यात्रियों की संख्या अधिक होने के बावजूद ट्रेनों की कमी के कारण लंबी वेटिंग और महंगे बस सफर की मजबूरी बनी रहती है। बड़े शहरों के लिए सीधी रेल कनेक्टिविटी नहीं होने से यात्रियों को दिल्ली जाकर दूसरी ट्रेन पकड़नी पड़ती है। जयपुर के लिए भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां से चार नियमित ट्रेनें जरूर संचालित होती हैं। बाकी कोई सप्ताह में दो, तीन दिन के लिए ही संचालित होती है। मुंबई के लिए सप्ताह में दो दिन, हैदराबाद और तिरुपति के लिए सप्ताह में एक ट्रेन का संचालन हो रहा है। समय अनुकूल नहीं, यात्रियों को परेशानी दिल्ली-जयपुर सैनिक एक्सप्रेस सुबह 4:40 बजे तथा लोहारू-सीकर डेमू सुबह 5:21 बजे झुंझुनू पहुंचती हैं। सीकर में डेमू ट्रेन करीब आधे घंटे रुकती है और बाद में दूसरे नंबर से संचालित होती है। ट्रेनों का समय इतना जल्दी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के यात्री स्टेशन तक समय पर नहीं पहुंच पाते। वहीं जयपुर के लिए सुबह 8:20 बजे हनुमानगढ़-जयपुर और दोपहर 12:45 बजे भटिंडा-जयपुर ट्रेन के बाद पूरे दिन कोई नियमित ट्रेन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दोपहर बाद यात्रा करने वालों को रोडवेज या निजी बसों का सहारा लेना पड़ता है। भीड़ के कारण नहीं मिल पाती जगह दिल्ली-जयपुर के बीच चलने वाली सैनिक एक्सप्रेस में खाटूश्यामजी जाने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। रींगस तक बड़ी संख्या में यात्री सवार रहते हैं, जिससे झुंझुनू के यात्रियों को सामान्य डिब्बों में सीट तो दूर, खड़े होने की जगह भी नहीं मिलती। कई बार यात्रियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है या निजी वाहनों और महंगी बसों का सहारा लेना पड़ता है। हरिद्वार, गोरखपुर, गुवाहाटी और जम्मू के लिए चले ट्रेन झुंझुनू से हरिद्वार, गोरखपुर, गुवाहाटी और जम्मू जैसे प्रमुख स्थानों के लिए भी सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं है। इन स्थानों पर जाने के लिए यात्रियों को दो-तीन ट्रेनें बदलनी पड़ती हैं, जिससे सफर लंबा और खर्चीला हो जाता है। रोज 4500 से अधिक यात्रियों का आवागमन, दो लाख से अधिक का राजस्व झुंझुनू रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसतन 4500 यात्री आवागमन करते हैं और करीब दो से ढाई लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। यदि दिल्ली के लिए नियमित ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए और जयपुर के लिए शाम के समय एक नियमित ट्रेन शुरू की जाए, तो जिले के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।



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