BJP प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ सोमवार शाम करीब 7 बजे बाड़मेर बीजेपी कार्यालय पहुंचे। वहां पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की। 21 अप्रैल को होने वाली पीएम नरेंद्र मोदी सभा को लेकर पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। मीडिया बातचीत में कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में रिफाइनरी को लेकर कुछ भी नहीं किया। सीएम और डिप्टी सीएम की लड़ाई में रिफाइनरी का कुछ काम नहीं हुआ। होटलों में बैठे रहे।आपस में लड़ते रहे। रिफाइनरी में हमें बहुत कुछ मिलेगा। करीब 90 हजार कर्मचारी डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार प्राप्त करेंगे। राजस्थान को प्रचुर मात्रा में पेट्रोल, डीजल, गैस, केरोसिन भी मिलेगा। रेलवे लाइनें बिछेगी। पानी के लिए पाइप लाइन बिछेगी। पाली, जोधपुर और बालोतरा का सिवरेज का पानी फिल्टर करके रिफाइनरी को देने के लिए डीपीआर तैयार होगी। अभी नाचना से शुद्ध पानी रिफाइनरी में जा रहा है। इलाके और सिवरेज का पानी ट्रिट करके रिफाइनरी को देने का प्रस्ताव है। राठौड़ ने कहा- पहले पचपदरा क्या हालात थे, अब जमीन की कीमतें बढ़ गई है। कितनी होटलें, हॉल, सड़कों को सदृढीकरण हुआ। इस इलाके लिए रिफाइनरी वरदान साबित होगी। अरब देशों में युद्ध की स्थिति में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी कूटनीति से जहाजों में तेल और गैस भी आती रही। किसी भी देश को हिम्मत नहीं हुई कि हमारे जहाज को छेड़ें। पीएम नरेंद्र मोदी 21 को रिफाइनरी को लोकापर्ण करने आ रहे है जो महापुरूष है। मैं इसलिए कह रहा हूं कि इनका कोई व्यक्तिगत परिवार नहीं है। उनका परिवार 140 करोड़ देशवासी है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत के रिफाइनरी को लेकर वसुंधरा को बोलने का हक बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेशायक्ष ने कहा- ठीक कह रहे है। हमारी ही नेता वसुंधरा है। अशोक गहलोत बहुत बड़े आदमी है। तीन बार के सीएम है। मैं उनकी व्यक्तिगत रूप से इज्जत करता हूं। गहलोत के रिफाइनरी में एमओयू में 3736 करोड़ रुपए प्रति वर्ष बिना ब्याज के 15 साल तक देना तय हुआ है। हमारी सरकार ने उसी कंपनी से हिस्सेदारी में एमओयू किया। अगर मेरी बात गलत है तो मैं एबीसीडी शुरू कर दूगा। फर्क नहीं आए तो उनको बोल देना। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के चुनाव नहीं कराने के बयान पर मदन राठौड़ ने कहा- चुनाव करवाना निर्वाचन आयोग का काम है। जो एक स्वतंत्र संस्था है। जब चुनाव करने की घोषणा कर देंगे। हमें चुनाव लड़ने के लिए मैदान में आना ही होगा। हमारे खिसकाने से नहीं खिसकता है। सरकार की मंशा चलती नहीं है। निर्वाचन आयोग तय करता है।
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