मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (UMIS) और कॉलेज मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम (CMIS) के नाम पर करोड़ों रुपए की कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। जिसे लेकर बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. संजीव कुमार सिं
.
पत्र में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार और कुलाधिपति के निर्देश के अनुसार विश्वविद्यालयों को भारत सरकार के निशुल्क SAMARTH पोर्टल पर नामांकन, पंजीयन, परीक्षा, वेतन और पेंशन से जुड़े कार्य करने थे। लेकिन बीएन मंडल विश्वविद्यालय में इन आदेशों की अनदेखी कर निजी एजेंसी के माध्यम से UMIS लागू किया गया और छात्रों से प्रति छात्र 248 रुपये की वसूली की जा रही है।
CMIS के नाम पर ढाई करोड़ की वसूली
साथ ही, उसी एजेंसी से जुड़े व्यक्ति द्वारा यश इन्फोसॉफ्ट नामक अलग एजेंसी बनाकर कॉलेजों में CMIS के नाम पर हर वर्ष करीब ढाई करोड़ रुपये वसूले जा रहे हैं। अब तक कुल 10 से 12 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का अनुमान जताया गया है, जबकि एग्रीमेंट के अनुसार 17 मॉड्यूल पर काम होना था, लेकिन केवल तीन मॉड्यूल ही संचालित हैं। छात्रों का डेटा भी सुरक्षित नहीं बताया गया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि UMIS एजेंसी का करार 20 अप्रैल 2024 से 19 अप्रैल 2025 तक के लिए था, लेकिन बिना सिंडीकेट के अनुमति के इसे आगे बढ़ाकर काम कराया जा रहा है। इसी मुद्दे पर कुलपति डॉ. बीएस झा द्वारा कथित दबाव के कारण विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अशोक कुमार ठाकुर, वित्त पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार और परीक्षा नियंत्रक डॉ. शंकर कुमार मिश्रा ने 16 मार्च 2026 को सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
जल्दबाजी में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति
आरोप है कि इसके बाद नियमों को दरकिनार कर नए पदाधिकारियों की जल्दबाजी में नियुक्ति कर दी गई। मामले में यह भी उल्लेख है कि सीनेट चुनाव के दौरान आचार संहिता की अनदेखी की गई और समर्थ पोर्टल के नोडल अधिकारी को कथित रूप से धमकियां दी गईं, लेकिन कार्रवाई के बजाय उनका स्थानांतरण कर दिया गया।
इसके अलावा, निजी एजेंसी को विश्वविद्यालय संसाधन उपलब्ध कराए जाने और अग्रिम भुगतान में अनियमितता के भी आरोप लगाए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय का माहौल अराजक हो चुका है और छात्र संगठन भी विरोध कर रहे हैं। ऐसे में राज्यपाल से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।