जोधपुर मंडल रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ अपना मानवीय चेहरा भी पेश किया है। आरपीएफ ने रेलवे स्टेशनों पर भटके हुए 69 बच्चों को रेस्क्यू कर उन्हें नया जीवन दिया है। 170 बिछड़े और बेसहारा लोगों को अपनों से मिलाने का काम किया है। इसके अलावा यात्रियों का करीब 91 लाख रुपए का खोया सामान भी सुरक्षित लौटाया गया है। जोधपुर डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया- भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म पर खोए और डरे-सहमे बच्चों के लिए ‘नन्हे फरिश्ते’ अभियान फरिश्ता साबित हुआ है। इस अभियान के तहत 69 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर न केवल उन्हें संरक्षण दिया गया, बल्कि उनके पुनर्वास के लिए जरूरी कदम उठाए गए। डीआरएम त्रिपाठी के अनुसार आरपीएफ ने ‘ऑपरेशन डिग्निटी’ के जरिए समाज से बिछड़े, निराश्रित और मानसिक रूप से अस्वस्थ 170 लोगों का भी सहारा बनकर उन्हें परिजनों या स्वयंसेवी संस्थाओं तक सुरक्षित पहुंचाया है। सालों से भटक रहे कई लोगों के लिए यह पहल अपने घर लौटने का जरिया बनी है। यात्रियों का 91 लाख का सामान लौटाया जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त नीतीश शर्मा ने बताया- मानवीय सरोकार और यात्रियों की मदद में भी आरपीएफ आगे रही है। ‘ऑपरेशन अमानत’ के तहत 456 यात्रियों का खोया हुआ सामान सुरक्षित उनके मालिकों के सुपुर्द किया गया। इस सामान की कुल कीमत 91.26 लाख रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 43.17 प्रतिशत अधिक है। इन प्रयासों से यात्रियों का भरोसा और रेलवे की छवि मजबूत हुई है। अपराधियों पर कसी नकेल, ‘ऑपरेशन सतर्क’ में 22 गिरफ्तार शर्मा ने बताया- मानवीय प्रयासों के साथ आरपीएफ ने कानून व्यवस्था पर भी पूरी सख्ती बरती है। अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन सतर्क’ के तहत 22 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर करीब 10.45 लाख रुपए मूल्य की अवैध शराब जब्त की गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 93.19 प्रतिशत अधिक है। वहीं, ‘ऑपरेशन नारकोस’ के तहत ट्रेनों में मादक पदार्थों के 3 मामले पकड़े गए, जिनकी कुल कीमत लगभग 6.72 लाख रुपए आंकी गई है। इन मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए राजकीय रेलवे पुलिस को सौंपा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में आरपीएफ के प्रमुख अभियान एक नज़र में:
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