फाजिल्का नगर कौंसिल की मंगलवार को नगर परिषद अध्यक्ष के कार्यकाल की आखिरी हाउस बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष, सभी पार्षद और नगर काउंसिल का स्टाफ मौजूद रहा। बैठक के दौरान न सिर्फ विकास कार्यों पर चर्चा हुई, बल्कि अध्यक्ष और पार्षदों ने एक-दूसरे का आभार व्यक्त किया और आपसी गिले-शिकवे भी दूर किए। उन्होंने कामना की कि आने वाले समय में होने वाले नगर कौंसिल चुनावों में सभी पार्षद फिर से चुनकर आएं और एक-दूसरे से मिलें। नगर परिषद अध्यक्ष एडवोकेट सुरिंदर सचदेवा ने बताया कि कांग्रेस की सरकार के दौरान पूर्व विधायक दविंदर सिंह घुबाया की अध्यक्षता में कांग्रेस का बोर्ड बना था। उन्हें इस बात का मलाल है कि 10 महीने बाद ही प्रदेश में सरकार बदल गई, जिससे उन्हें अपनी सरकार के दौरान काम करने का बहुत कम समय मिला। सरकार ने दिया 5 करोड़ 67 लाख एमएफडी फंड हालांकि, उन्होंने गर्व से कहा कि 5 साल के कार्यकाल के दौरान शहर के विकास पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए नगर कौंसिल ने अपने फंड यानी लोगों के टैक्स के पैसे से जुटाए हैं। सरकार की ओर से महज तीन महीने पहले एमडीएफ (MDF) के नाम पर 5 करोड़ 67 लाख रुपए ही दिए गए। विकास कार्यों का ब्यौरा देते हुए अध्यक्ष ने बताया कि इन पांच वर्षों में शहर की विभिन्न मुख्य सड़कों पर 3 करोड़ 73 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। शिवपुरी में 30 लाख की लागत से इंटरलॉकिंग टाइलें लगाई गई हैं, जबकि शहर के सभी वार्डों में इंटरलॉकिंग के काम पर करीब 7 करोड़ 12 लाख रुपए व्यय किए गए। इसके अलावा, विभिन्न कॉलोनियों के कम्युनिटी हॉल पर 80 लाख रुपए और पार्कों के सुधार पर 1 करोड़ 39 लाख रुपए खर्च किए गए। सीवरेज की समस्या के समाधान के लिए 65 लाख की लागत से जेटिंग मशीन खरीदी गई। स्ट्रीट लाइटों की संख्या 4270 से बढ़ाकर 5443 की गई, जिस पर 1 करोड़ 10 लाख रुपए खर्च हुए। गाड़ियों की रिपेयर और सीवरेज के ढक्कन आदि अन्य कार्यों पर भी 3 करोड़ रुपए खर्च किए गए। 2.15 करोड़ का हाउस टैक्स जुटाया राजस्व की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि साल 2025-26 में नगर कौंसिल स्टाफ ने 2 करोड़ 15 लाख रुपए हाउस टैक्स और 13 लाख रुपए फायर सेस के रूप में रिकवर किए हैं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एमडीएफ के तहत मिले 5 करोड़ 67 लाख रुपए के फंड को सिर्फ 11 वार्डों तक सीमित रखा गया और बाकी 14 वार्डों को नजरअंदाज किया गया। अध्यक्ष ने इस बात पर दुख जताया कि उनके कार्यकाल के बावजूद आज भी शहर का नया बस स्टैंड शुरू नहीं हो पाया है। अंत में उन्होंने राजनीतिक समन्वय की प्रशंसा करते हुए कहा कि नगर कौंसिल में बोर्ड चाहे कांग्रेस का था, लेकिन वहां विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं रही। उन्हें आम आदमी पार्टी और भाजपा के पार्षदों का भी भरपूर सहयोग मिला। इस विदाई बैठक में पार्षद पूजा लूथरा सचदेवा, जसप्रीत दुरेजा, सुरिंदर कालड़ा, पूर्ण, जगदीश बिसवाला, सीमा रानी, पालचंद वर्मा और नगर कौंसिल ईओ वीर विक्रम धूड़िया सहित तमाम पार्षद और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
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