अजमेर जिले के विभिन्न स्कूलों में मंगलवार को एक अनोखी पहल देखने को मिली, जहां कोर्ट में न्याय देने वाले जज बच्चों के बीच ‘टीचर’ बनकर पहुंचे। जिले के 32 स्कूलों में जजों ने विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी की बारीकियां समझाते हुए ऑनलाइन खतरों से बचने के उपाय बताए। एसीजेएम (PCPNDT) कोर्ट की जज रितिका कपूर ने कोटड़ा स्थित सेंट्रल एकेडमी स्कूल में साइबर सुरक्षा पर विशेष क्लास ली। उन्होंने साइबर बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान स्कूल के प्रिंसिपल अजय सिंह और स्टाफ मौजूद रहा। गाजियाबाद के ट्रिपल सुसाइड केस का उदाहरण दिया जज रितिका कपूर ने बच्चों को हाल ही में गाजियाबाद में हुए ट्रिपल सुसाइड केस का उदाहरण देते हुए गेम एडिक्शन के दुष्प्रभाव समझाए। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। यह जिम्मेदारी अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन दोनों की है। ‘साइबर क्राइम किसी के साथ भी हो सकता है’ वहीं सिविल लाइंस स्थित जवाहर स्कूल में ACJM-3 कोर्ट की जज सलोनी माथुर ने छात्रों से संवाद करते हुए साइबर क्राइम की परिभाषा समझाई। उन्होंने बताया कि इंटरनेट के जरिए किसी को परेशान करना साइबर अपराध है और यह लड़कियों ही नहीं, लड़कों के साथ भी हो सकता है। उन्होंने बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया के सीमित उपयोग की सलाह दी। कहा कि देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद और समझने की क्षमता पर असर पड़ता है। साथ ही इंस्टाग्राम रील्स और ऑनलाइन गेम्स, जैसे PUBG, के प्रति सतर्क रहने को कहा। सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने से बचें जज माथुर ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर शेयर की गई फोटो का गलत इस्तेमाल हो सकता है, इसलिए सावधानी जरूरी है। खुद के साथ हुई फ्रॉड की कोशिश साझा की जज सलोनी माथुर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार किसी ने उनके पिता के दोस्त बनकर फोन किया और पैसे ट्रांसफर करने को कहा। शक होने पर उन्होंने पहले पिता से पुष्टि की, जिससे एक बड़ा साइबर फ्रॉड टल गया। जागरूकता ही बचाव जजों ने छात्रों को संदेश दिया कि साइबर अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें और पहले सत्यापन जरूर करें।
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