डूंगरपुर में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के नेता और सांसद राजकुमार रोत के खिलाफ संसद में की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर आदिवासी समाज में गहरा रोष है। इसी क्रम में बीएपी के जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपकर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की। बीएपी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर एकत्रित होकर गृह मंत्री के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने सांसद राजकुमार रोत द्वारा नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी बात रखने के बाद उनके लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। बीएपी ने इस टिप्पणी को न केवल सांसद का अपमान, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला बताया। भारत आदिवासी पार्टी ने इस बयान को ‘अमर्यादित’ और ‘धमकी भरा’ करार दिया है। बीएपी नेताओं का कहना है कि गृह मंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि और पूरे आदिवासी समाज को नक्सलवाद से जोड़ने का प्रयास किया है। उनका तर्क है कि सांसद राजकुमार रोत संसद में जल-जंगल-जमीन और संविधान की 5वीं व 6वीं अनुसूची को लागू करने की बात कर रहे थे, लेकिन उनकी आवाज दबाने के लिए ‘नक्सलवाद का ठप्पा’ लगाया गया। इस बयान से देशभर के आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों में भारी रोष व्याप्त है। प्रदर्शन के बाद बीएपी ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में गृह मंत्री से नैतिक आधार पर तुरंत इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही, गृह मंत्री द्वारा पूरे सदन के सामने राजकुमार रोत और आदिवासी समुदाय से माफी मांगने की भी मांग की गई है। बीएपी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर उचित कार्रवाई नहीं हुई और माफी नहीं मांगी गई, तो आने वाले समय में पूरे देश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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