मोहाली जिले में जीएमसीएच चंडीगढ़ से डिस्चार्ज होने के अगले दिन 59 वर्षीय उषा रानी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। बता दे कि डेराबस्सी सिविल अस्पताल पहुंचने पर महिला को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। जानकारी के अनुसार, पंडवाला गांव निवासी उषा रानी को 29 मार्च को सीने में दर्द की शिकायत के बाद जीएमसीएच चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके हृदय में ब्लॉकेज की पहचान की थी और स्टेंट डालने की योजना बनाई थी। हालांकि, बुखार के कारण यह प्रक्रिया तीन बार स्थगित करनी पड़ी। बिना स्टेंट कर दी छुट्टी मृतका के बेटों मनीत सिंह और मनीष सिंह ने बताया कि 7 अप्रैल को डॉक्टरों ने उनकी मां को यह कहकर छुट्टी दे दी कि उन्हें 9 अप्रैल को दोबारा भर्ती किया जाएगा और 10 अप्रैल को स्टेंट डाला जाएगा। परिजनों ने डॉक्टरों से अनुरोध किया था कि जब दो दिन बाद फिर से भर्ती करना है तो मरीज को डिस्चार्ज न किया जाए, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित किया परिजनों के मुताबिक, डिस्चार्ज के अगले ही दिन बुधवार दोपहर उषा रानी को दोबारा सीने दर्द हुआ। इसके बाद वे उन्हें तुरंत डेराबस्सी सिविल अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल पर लापरवाही का आरोप परिवार का आरोप है कि पूरी तरह ठीक किए बिना और स्टेंट डाले बिना मरीज को डिस्चार्ज करना ही उनकी मौत का मुख्य कारण बना। इस घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश है। हालांकि, परिवार ने पोस्टमार्टम करवाए बिना ही पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की जांच करने और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
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