पूर्णिया में धूमधाम से मनाई परशुराम जयंती:झांकियों संग शहर में निकली विशाल शोभा यात्रा, नेपाल-बंगाल से आए कलाकारों ने दी प्रस्तुती




पूर्णिया में बड़े ही धूमधाम से परशुराम जयंती मनाई गई। शहर के टाउन हॉल में परशुराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। भगवान विष्णु के परशुराम की जयंती को लेकर शहर में विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा ब्रह्माशक्ति के बैनर तले निकली, जो शहर के चूनापुर शिव मंदिर प्रांगण से होते हुए टाउन हॉल आकर संपन्न हुई। पाल से आए कलाकारों की टोलियों ने जबरदस्त प्रस्तुति दी इसमें हजारों लोग शामिल हुए। यात्रा में शामिल एक से बढ़कर एक झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।शोभा यात्रा में बंगाल ही नहीं बल्कि नेपाल से आए कलाकारों की टोलियों ने जबरदस्त प्रस्तुति दी। मां काली और नर मूंड के साथ निकली झांकी ने लोगों का मन मोह लिया। शोभा यात्रा में शामिल मां काली की झांकी ने लोगों की खूब वाहवाही बटोरी। लोग हाथों में खड्ग, तलवार और ध्वज लिए पूरे रास्ते जय परशुराम के नारे लगाते रहे। शहर के टाउन हॉल में भगवान परशुराम जयंती की भव्य शुरुआत ब्रह्मशक्ति के सदस्यों ने दीप प्रज्जवलित कर की। इसमें पटना से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। एक से बढ़कर प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। भगवान कृष्‍ण को सुदर्शन चक्र परशुराम ने ही दिया कार्यक्रम के संयोजक संजीव झा और सहसंयोजक अम्बरीष झा ने बताया कि भगवान कृष्‍ण को सुदर्शन चक्र परशुराम ने ही दिया था। द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्‍ण जब शिक्षा ग्रहण करने के बाद परशुराम जी से भेंट करने पहुंचे, तो परशुराम जी ने उन्हें सुदर्शन चक्र दिया। जिसके द्वारा करुणावतार में भगवान विष्णु ने अनेकों दुष्‍टों और दानवों का वध किया। वहीं, रामावतार में परशुराम जी ने भगवान राम को शारंग नाम का धनुष दिया था। कन्हैया झा और अमरनाथ उपाध्याय ने कहा कि परशुराम के गुरु शिव हैं। विश्वामित्र और ऋचीक को भी इनका गुरु कहा गया है। परशुराम भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण के गुरु थे। एक बार गणेश जी ने परशुराम जी को भगवान शिव के दर्शन करने से रोक दिया था, तभी क्रोध में आकर परशुराम जी ने अपने परशु से गणेश जी का एक दांत तोड़ दिया था। तभी से गणेश जी का नाम एकदंत पड़ा।



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