मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने भिंड जिले, विशेषकर लहार और रौन क्षेत्र में ‘मप्र-यूपी सिंडिकेट’ के जरिए करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। डॉ. गोविंद सिंह ने सीधेतौर पर खाद्य अधिकारियों और भाजपा नेताओं की सांठगांठ को इस लूट का जिम्मेदार बताया है। ₹2100 में खरीदा, ₹2625 में बेचा: ‘बॉर्डर पार’ का बड़ा खेल डॉ. गोविंद सिंह ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में गेहूं की बाजार कीमत लगभग 2100 रुपए है, जबकि मध्यप्रदेश में बोनस मिलाकर MSP 2625 रुपए प्रति क्विंटल पड़ रही है। इसी अंतर का फायदा उठाने के लिए यूपी के अनाज माफिया सक्रिय हैं। यूपी का सस्ता गेहूं फर्जी पंजीयन के जरिए एमपी के केंद्रों पर खपाया जा रहा है। प्रति क्विंटल सीधेतौर पर 500 रुपए से ज्यादा का चूना सरकार को लगाया जा रहा है। खरीदी शुरू होने से पहले ही 5000 क्विंटल माल तैयार सबसे हैरान करने वाला मामला लहार के उपार्जन केंद्रों पर सामने आया है। डॉ. सिंह के मुताबिक सरकारी खरीदी विधिवत शुरू होने से पहले ही केंद्रों पर 4 से 5 हजार क्विंटल गेहूं भरा पाया गया। किसानों के स्लॉट बुक होने से पहले ही नागरिक आपूर्ति निगम का बारदाना (बोरियां) माफियाओं तक पहुंचा दिया गया। जिला प्रशासन की छापेमारी में हजारों क्विंटल गेहूं खुले में और बोरियों में भरा मिला, जिसे आनन-फानन में मजदूरों से भरवाया जा रहा था। भिंड जिले की सहकारी समिति अमाहा के सचिव पहले पकड़े जा चुके हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि बीजेपी के एक मंडल अध्यक्ष ने दतिया जिले से गेहूं खरीदकर भिंड जिले में बेचा है। खरीद केंद्र बनाने के लिए जिला खाद्य अधिकारी 5 लाख रुपए प्रति केंद्र वसूल करते हैं। जहां पहुंच नहीं हैं। वहां दूरस्थ क्षेत्रों में खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। नरेश सिंह नाम का मेहगांव विधानसभा का एक कार्यकर्ता का वेयरहाउस तीन साल से नहीं भर पा रहा है। उसकी जब जमीन बिकने लगी तो वह पैसे लेकर आया और 5 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। उसका वीडियो भी सामने आया है। नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी बिना पैसे केंद्र नहीं बनाते। 5-5 लाख की रिश्वत और बिना रास्ते के केंद्र डॉ. गोविंद सिंह ने भ्रष्टाचार की जड़ पर हमला करते हुए कहा कि उपार्जन केंद्रों का चयन सेवा के लिए नहीं, बल्कि ‘मेवा’ के लिए किया गया है। डॉ. सिंह ने दावा किया कि एक-एक उपार्जन केंद्र बनाने के बदले 5-5 लाख रुपए की रिश्वत ली गई है। भ्रष्टाचार की हद यह है कि ऐसे दुर्गम स्थानों पर केंद्र बना दिए गए हैं जहां पहुंचने का रास्ता तक नहीं है, ताकि एकांत में माफिया आसानी से यूपी का गेहूं उतार सकें। किसान बेहाल, माफिया मालामाल एक तरफ जहां भाजपा नेता और अधिकारी करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश का असली किसान परेशान है। पोर्टल और सर्वर की दिक्कतों के कारण असली किसान अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक नहीं कर पा रहे हैं। सरकारी केंद्रों पर जगह न मिलने और माफियाओं के कब्जे के कारण किसान मंडियों में 2122 रुपए के कम भाव पर गेहूं बेचने को मजबूर है। खाद्य अधिकारी और भाजपा नेताओं की ‘जुगलबंदी’ डॉ. सिंह ने सीधेतौर पर जिला खाद्य अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरी मशीनरी भ्रष्टाचार में डूबी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के स्थानीय नेताओं के संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली सोसायटियों को दरकिनार कर दागी और ब्लैकलिस्टेड संस्थाओं को खरीदी का जिम्मा सौंपा गया है। बड़ी मांग: उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जेल नहीं भेजा गया, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने शासन को होने वाले करोड़ों के आर्थिक नुकसान की भरपाई दोषियों की संपत्ति कुर्क कर करने की मांग की है।
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