बोड़ाकी में प्रस्तावित अंतराष्ट्रीय स्तर के रेलवे स्टेशन के निर्माण की राह अब साफ हो गई है। लंबे समय से जमीन अधिग्रहण को लेकर अटकी इस परियोजना में अब तेजी आएगी, क्योंकि किसान जमीन देने के लिए सहमत हो गए हैं। इस फैसले के बाद न सिर्फ नोएडा- ग्रेटर नोएडा को बड़ा रेलवे हब मिलेगा, बल्कि दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। रेलवे और प्राधिकरण इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से विकसित कर रहे हैं। योजना के तहत यहां 13 प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे और स्टेशन का कुल क्षेत्रफल करीब 267 एकड़ होगा। इसके लिए लगभग 137 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत थी, जिस पर अब सहमति बन गई है। 1800 परिवारों के पुर्नवास की तैयारी
परियोजना के तहत आने वाले करीब 1800 परिवारों के पुनर्वास की भी तैयारी पूरी कर ली गई है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित किसानों को उनके वर्तमान आवास के बराबर जमीन शिव नादर विश्वविद्यालय के पास दी जाएगी, जहां उन्हें बसाया जाएगा। इससे पुनर्वास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो गई है और विरोध की संभावना कम हो गई है। 70 से अधिक ट्रेनों का होगा संचालन
बोड़ाकी स्टेशन का विस्तार इसलिए भी अहम है क्योंकि दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल पर ट्रेनों और यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। नए स्टेशन के तैयार होने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली 70 से अधिक ट्रेनों का संचालन यहां से किया जाएगा। इससे यात्रियों को भी राहत मिलेगी और दिल्ली के रेलवे नेटवर्क पर लोड कम होगा। मेट्रो से मिलेगी कनेक्टिविटी
इसके साथ ही, नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन का विस्तार भी बोड़ाकी तक किया जाएगा, जिससे स्टेशन की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। यह स्टेशन भविष्य में मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित हो सकता है, जहां रेल और मेट्रो के साथ अन्य परिवहन सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। अधिकारियों का कहना है कि जमीन से जुड़ी बाधाएं दूर होने के बाद अब परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
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