पाली घाट पर चालीस साल के कछुए की मौत:वन विभाग कछुए का पोस्टमार्टम करवाकर शव का किया अंतिम संस्कार




नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी के पाली घाट पर रविवार शाम एक उम्रदराज मादा कछुए की मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग में हलचल मच गई और वनाधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की गई। गश्त के दौरान मृत मिला कछुआ पाली घाट रेंजर किशन सांखला ने बताया रविवार शाम करीब 6.30 बजे वन विभाग की टीम सरकारी बोट से चंबल नदी में गश्त कर रही थी। इसी दौरान नारोला घाट के पास एक कछुआ मृत अवस्था में मिला। जिसे कब्जे में लेकर पाली घाट लाया गया। जिसका बाद में पोस्टमार्टम कराया गया। चालीस साल थी कछुए की उम्र रणथंभौर वेटरनरी हॉस्पिटल के उप निदेशक डॉ. चंद्र प्रकाश मीणा ने बताया कि मृत कछुए का पोस्टमार्टम पाली घाट पर ही किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कछुए की मौत उसके वाइटल ऑर्गन फेल होने के कारण हुई है। उन्होंने बताया कि मादा कछुए की उम्र करीब 40 वर्ष थी, जो कि कछुओं की प्राकृतिक आयु सीमा के अनुरूप मानी जाती है।
डॉ. मीणा के अनुसार यह मामला पूरी तरह से प्राकृतिक मौत का प्रतीत हो रहा है। कछुए ने अपनी जैविक उम्र पूरी कर ली थी, जिसके चलते उसके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया। इसके बाद नियमानुसार कछुए का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
वन विभाग इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कछुए के सैंपल जांच के लिए IVRI (Indian Veterinary Research Institute) भेजेगा। इन सैंपलों की जांच से अभयारण्य में रहने वाले वन्यजीवों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी करने और किसी संभावित बीमारी का पता लगाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जांचें वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद जरूरी होती हैं। इससे अभयारण्य में रहने वाले अन्य कछुओं और जलीय जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। वन विभाग लगातार अभयारण्य में वन्यजीवों की सेहत पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।



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