- Hindi News
- National
- Parliament Seats Increase | 33% Women Reservation From 2029; South States Oppose
नई दिल्ली9 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
केंद्र सरकार ने लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इसका ड्राफ्ट बिल सांसदों के साथ शेयर किया है। प्रस्ताव के मुताबिक, 850 में से 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाएंगी।
सरकार इस बदलाव के लिए संविधान संशोधन की तैयारी में है। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन किया जाएगा। इसके लिए 16 अप्रैल से संसद का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है।
इस बिल को 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है। यह कदम देश में संसदीय प्रतिनिधित्व को बड़े स्तर पर बदल सकता है, हालांकि इस पर विरोध भी शुरू हो गया है।
2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन
बिल में सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने की बात कही गई है। फिलहाल आधिकारिक जनसंख्या आंकड़े 2011 जनगणना के ही हैं।
सरकार इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए संविधान संशोधन बिल, परिसीमन कानून से जुड़ा बिल और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर व पुडुचेरी जैसे विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक सक्षम बिल भी लोकसभा में पेश करेगी।
बिल को लेकर विपक्ष का विरोध
- तामिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन- दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए केंद्र की नीतियों का पालन किया, लेकिन अब उन्हें इसकी सजा मिल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से संसद में यह भरोसा देने की मांग की कि दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों को साथ लाकर चेन्नई में एक संयुक्त बैठक की गई थी, ताकि इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाई जा सके।
- राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल– सरकार इस कदम को 2029 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से ला रही है। अगर सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देना चाहती है, तो मौजूदा 543 सीटों में ही यह लागू किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीटों के पुनर्वितरण से उत्तर भारत को ज्यादा फायदा होगा।
- तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी- अगर सीटें अनुपात के आधार पर बढ़ाई गईं, तो दक्षिणी राज्यों में महिलाओं, SC और ST समुदायों को नुकसान हो सकता है। यह कदम दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की साजिश हो सकता है।