राज्यसभा सदस्य सीमा द्विवेदी और 11 अन्य के खिलाफ दर्ज आचार संहिता उल्लंघन का एक मुकदमा वापस ले लिया गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय अनुज कुमार जौहर की अदालत ने सरकारी वकील के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। यह मामला 2017 का था। यह मामला 7 मार्च 2017 को पवारा थाने में दर्ज किया गया था। हेड कांस्टेबल दीपचंद राम ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी सीमा द्विवेदी भगौती चौराहा पर चार वाहनों से चुनाव प्रचार कर रही थीं, जो आचार संहिता का उल्लंघन था। राज्यपाल की ओर से इस मुकदमे को वापस लेने की अनुमति दी गई थी। सरकारी वकील ने अपने प्रार्थना पत्र में तर्क दिया कि इस मामले से समाज के हित पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और राज्यहित में केस वापस लेना आवश्यक है। अदालत ने जनहित, न्याय हित और शासन के पत्र के आलोक में केस वापस लेने के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया। पुलिस ने इस मामले में आचार संहिता उल्लंघन का आरोप पत्र दाखिल किया था और चार गवाहों के बयान दर्ज किए थे। हालांकि, जांच में यह सामने आया कि सीमा द्विवेदी मौके पर मौजूद नहीं थीं और चुनाव प्रचार से संबंधित कोई सामग्री भी नहीं मिली थी। घटना की वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त 2021 को एक आदेश जारी किया था, जिसके अनुपालन में हाईकोर्ट में पंजीकृत सुओ मोटू रिट याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट से 22 जनवरी 2026 को मुकदमा वापस लेने की अनुमति प्राप्त हुई।
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