NBRI में विजेताओं को सम्मानित करते एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला। साथ में निदेशक डॉ.अजीत कुमार शासनी।
स्पेस साइंस के क्षेत्र में भारत तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया की अपेक्षाओं से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही देश का अपना स्पेस स्टेशन भी अंतरिक्ष में स्थापित होगा। ये कहना हैं कि इंडियन एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभां
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समापन समारोह के मुख्य कार्यक्रम में डिजिटल फोटोग्राफी, मौखिक व्याख्यान और पोस्टर प्रस्तुति जैसी प्रतियोगिताएं हुईं, जिनमें करीब 200 शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी ने कहा कि शोधार्थी संस्थान की रीढ़ होते हैं और उनका शोध देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाता है।
भारत के संविधान की ये हैं खूबी शुभांशु ने बताया कि भारत का संविधान दुनिया का इकलौता ऐसा संविधान है जो अपने नागरिकों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने को मौलिक कर्तव्य मानता है। अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर माइक्रोग्रेविटी में सायनोबैक्टीरिया और शैवाल पर किए गए प्रयोगों का जिक्र किया और कई रोचक घटनाएं भी सुनाईं।