मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की 130वीं बोर्ड बैठक में 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नगर निगम को हस्तांतरित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस प्रक्रिया को 15 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, जिसके लिए नगर निगम ने अपनी सहमति दे दी है। इन एसटीपी के मरम्मत और संचालन के लिए मेडा की ओर से नगर निगम को 10 से 15 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। बैठक में अन्य कई प्रमुख प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई। मेडा के अंतर्गत कुल 13 एसटीपी की शोधन क्षमता 107 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) है, जबकि वर्तमान में इन्हें 61.6 एमएलडी सीवेज प्राप्त हो रहा है। इनमें शताब्दीनगर, वेदव्यासपुरी, लोहिया नगर, पल्लवपुरम, गंगानगर, स्पोर्ट्स गुड्स कांप्लेक्स, मोदीपुरम तिराहा, रक्षापुरम, सैनिक विहार, श्रद्धापुरी और पांडव नगर के एसटीपी शामिल हैं। बोर्ड बैठक में मेडा की तीन प्रमुख कॉलोनियों – शताब्दीनगर, लोहियानगर और गंगानगर में 22 हेक्टेयर भूमि पर नए सिरे से प्लाटिंग करने का भी निर्णय लिया गया। यह भूमि पहले प्राथमिक स्कूल, डाकखाना, टेलीफोन एक्सचेंज और सामुदायिक भवन जैसे सार्वजनिक उपयोगों के लिए आरक्षित थी, लेकिन लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी थी। इस भूमि का भू-उपयोग बदलकर नए सिरे से लेआउट प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे व्यावसायिक भूखंडों की संख्या बढ़ने की संभावना है। यह जमीन या तो खाली पड़ी थी या किसानों द्वारा अवैध रूप से खेती के लिए उपयोग की जा रही थी। मेडा ने लैंड मोनेटाइजेशन के पहले चरण में 28.67 हेक्टेयर भूमि पर 1455 भूखंड विकसित किए थे। इनमें ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी, एचआईजी श्रेणी के आवासीय और व्यावसायिक भूखंड शामिल थे। इनके आवंटन से प्राधिकरण को लगभग 700 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। मेरठ महायोजना 2031 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरे प्राधिकरण क्षेत्र को 24 जोन में विभाजित किया गया है। महायोजना 2031 का कुल क्षेत्रफल पिछली महायोजना से दोगुना होकर 1043 वर्ग किलोमीटर हो गया है, जिसमें 305 गांव और नौ नगर शामिल हैं।
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