आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज में कार्यवाहक कुलसचिव डॉ. पी. एस. प्रमाणिक को कार्यवाहक कुलपति का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। यह निर्णय वरिष्ठता सूची में उनसे ऊपर मौजूद पांच प्रोफेसरों की अनदेखी कर लिया गया है, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों में असंतोष है। विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने अपनी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए राजभवन को पत्र लिखकर कार्यभार हस्तांतरण की बात कही थी। उन्होंने ही डॉ. पी. एस. प्रमाणिक को कुलपति का प्रभार सौंपने की सिफारिश की थी। वरिष्ठता सूची में डॉ. प्रमाणिक छठवें स्थान पर हैं। उनसे ऊपर डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. आरके दोहरे, डॉ. भगवान दीन, डॉ. आरके जोशी और डॉ. नमिता जोशी जैसे पांच वरिष्ठ प्रोफेसर मौजूद हैं। इन सभी को दरकिनार कर डॉ. प्रमाणिक को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। सूत्रों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब डॉ. प्रमाणिक को वरिष्ठों की अनदेखी कर पद दिया गया है। पूर्व में उन्हें कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर भी वरिष्ठ शिक्षकों ने विरोध किया था, जिसे तब भी अनसुना कर दिया गया था। विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि यह निर्णय पूर्व कुलपति के प्रभाव का परिणाम है, जिसका उद्देश्य कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच को प्रभावित करना हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें राजभवन के अगले कदम पर टिकी हैं।
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