यूपी बोर्ड में साधना सप्ताह की कार्यशाला आयोजित:सार्वजनिक संस्थानों में जवाबदेही एवं ऑडिट आधारित सुधार की भूमिका पर हुई चर्चा




यूपी बोर्ड के प्रयागराज स्थित मुख्यालय में सोमवार को “मिशन कर्मयोगी” के अंतर्गत राष्ट्रव्यापी “साधना सप्ताह” (02 से 08 अप्रैल) के क्रम में कार्यशाला का आयोजन किया गया। “सार्वजनिक संस्थानों में जवाबदेही एवं ऑडिट आधारित सुधार की भूमिका” विषय पर केंद्रित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के सचिव भगवती सिंह ने की। जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रधान महालेखाकार (उत्तर प्रदेश) राजकुमार उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान सचिव भगवती सिंह ने कहा कि ‘साधना सप्ताह’ मात्र एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वयं को जनसेवा के प्रति समर्पित करने का एक संकल्प है। उन्होंने अधिकारियों से ‘कर्मयोगी’ की भांति ज्ञान को सेवा में बदलने का आह्वान किया। वहीं मुख्य अतिथि राजकुमार ने कहा कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग कार्य की दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने ऑडिट की तुलना ‘तटबंध’ से करते हुए कहा कि यह सार्वजनिक योजनाओं को भटकने से रोकता है। उन्होंने बताया कि अब ऑडिट का आधुनिक दृष्टिकोण केवल यह नहीं देखता कि कितना काम हुआ (आउटपुट), बल्कि यह देखता है कि जनता को उससे क्या लाभ मिला (आउटकम)। सिस्टम की कमियों को दूर करने और डेटा वैलिडेशन पर भी विशेष बल दिया।

​कार्यशाला के दौरान ‘कर्मयोगी संवाद’ के माध्यम से परिषद के कर्मचारियों जिनमें आकांक्षा हेमकर, आलोक पाण्डेय,प्रज्ज्वल पाण्डेय, सुमित विश्वकर्मा और शंकर लाल सरोज ने अपनी कार्यप्रणालियों को साझा किया। उप-सचिव ऋचा श्रीवास्तव और आनन्द कुमार त्रिपाठी ने मिशन कर्मयोगी से संबंधित प्रेरक वीडियो प्रस्तुत किए और कार्यक्रम का संचालन भी किया।



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