इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश सिंह बबुआ ने पत्र में पुस्तकों की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी और हर साल बिना ठोस कारण पाठ्यक्रम बदलने पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भी इस पहल का समर्थन किया है। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के अधिकांश निजी विद्यालय अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव डाल रहे हैं। स्कूल प्रबंधन मनमाने तरीके से किताबों की कीमतें बढ़ा रहा है और अभिभावकों को केवल तय दुकानों से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है और अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। बार एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्कूल हर साल पुस्तकों का नया संस्करण जारी कर देते हैं, जबकि पाठ्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता। केवल मामूली संशोधन करके नई किताबें अनिवार्य कर दी जाती हैं, जिससे अभिभावकों को हर वर्ष नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। एसोसिएशन ने इसे अभिभावकों के साथ अन्याय बताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने बार एसोसिएशन का समर्थन करते हुए कहा, “मैं बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं के साथ हूं। जिस तरह स्कूल बार-बार पाठ्यक्रम में बदलाव कर किताबें बदल रहे हैं, वह गलत है। ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे के अनुसार किताबें बदली जा रही हैं। यह मनमानी कम होनी चाहिए।” बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
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