आज के बाद सेंट्रल मार्केट के 860 आवासीय भूखंडों में कोई दुकान नहीं चलेगी और 2 महीने के अंदर अंदर सेटबैक के तहत सबको अपने प्रतिष्ठान तोड़ने भी होंगे। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुरूवार को हुई सुनवाई के दौरान किया गया। इसके बाद व्यापारियों में आवास विकास के खिलाफ गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया है, उनका कहना है कि यदि आवास विकास सही समय पर सही साक्ष्य माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करते तो आज जिस प्रकार से व्यापारियों के रोजगार बंद हो रहे हैं वैसा नहीं होता।
सबसे पहले जानिए सुनवाई में क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को हुई सुनवाई के बारे में मार्केट के लीगल एडवाइजर और सुप्रीम कोर्ट में जो मामला चल रहा उसमें सक्रिय रहने वाले एडवोकेट अंजनेय सिंह ने गताया किजो 44 संपत्तियां आवास विकास द्वारा सील की गई है उनको राहत देने से मना कर दिया है। इसके साथ ही बाकी जो संपत्तियां हैं उनको आदेश दिया है कि इन प्रतिष्ठानों में कोई भी कमर्शियल गतिविधि नहीं चलेगी। इसके साथ ही अपने नक्शे के हिसाब से अपने अस्वीकृत प्रतिष्ठान को तोड़ लीजिए इसके लिए दो महीने का समय दिया गया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेटबैक के बाद भी इसमें कोई भी कमर्शियल गतिविधि नहीं की जाएगी, इन तमाम भूखंडों में जब तक सरकार कोई नई नीति नहीं लेकर आती है तब तक कोई प्रतिष्ठान नहीं चल पाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होनी है। सुप्रीम कोर्ट में आया 70 करोड का मामला
अंजनेय सिंह ने बताया भू-उपयोग बदलने के लिए आवास विकास में व्यापारियों द्वारा श्मन शुल्क के रूप में दिए गए लगभग 70 करोड़ रूपये के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे द्वारा भू उपयोग बदलने का कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया था। यह केवल आवास विकास द्वारा आपके साथ एक फ्रॉड किया गया है। अपने पैसे की मांग आवास विकास से कीजिए। इस प्रकरण पर आवास विकास के प्रमुख सचिव बी गुरुप्रसाद ने कहा कि व्यापारियों ने अपनी मर्जी से पैसा जमा किया है, जबकि सच्चाई यह है कि आवास विकास द्वारा नोटिस आया था जिसके तहत व्यापारियों ने भू उपयोग बदलवाने के लिए श्मन शुल्क जमा किया था। व्यापारियों द्वारा जो पैसा आवास विकास को दिया है, उसके सभी सबूत हमारे पास हैं। हम अभी भी आवास विकास से यही मांग करते हैं कि जो पैसा उन्होंने भू उपयोग बदलने के लिए लिया है वह उसको बदल दें। आवास विकास ने किया धोखा- नवीन गुप्ता संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बताया कि व्यापारियों द्वारा जो बंदी की गई थी वह आवास विकास के उन अधिकारियों के खिलाफ है जिन्होंने हमारे बाजार में सीलिंग की कार्रवाई होने के लिए मजबूर किया है। सुप्रीम कोर्ट में अगर 6 तारीख की सुनवाई में ही सही दस्तावेज पेश करते तो व्यापारियों को जो दिन आज देखना पड़ रहा है इसकी नौबत नहीं आती। आज जो साक्ष्य पेश हुए हैं उसके बाद 2 महीने का समय दिया गया है। अब हमारे व्यापारी का व्यापार तो बंद रहेगा लेकिन हम उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के माध्यम से इन व्यापारियों के प्रतिष्ठानों को बचाने का काम करेंगे। 1500 करोड़ का व्यापार प्रभावित नवीन गुप्ता ने बताया कि पूरे मेरठ में आज बंदी के कारण लगभग 1500 करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ है। इससे न सिर्फ व्यापारियों का नुकसान हुआ है बल्कि उनसे जुड़े सभी लोगों का नुकसान हुआ है। हजारों लोगों की आजीविका आज आवास विकास के कारण प्रभावित हुई है। हमारी मांग यह है कि अब जो हमें समय मिला है इसमें सरकार इस प्रकरण में मध्यस्थता करें और दुकानों को बचाने का काम करें। जितना व्यापार रोजाना जिले में होता है उसमें से लगभग 20% का व्यापार रोजाना सेंट्रल मार्केट से होता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जो इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है इससे न सिर्फ सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों का नुकसान होगा बल्कि मेरठ की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होगी। इस कार्रवाई से सिर्फ वह व्यापारी प्रभावित नहीं होंगे जिनकी यहां दुकान थी बल्कि जिले भर में इसका असर देखने को मिलेगा और इसका पूर्ण रूप से जिम्मेदार केवल आवास विकास होगा। आवास विकास के अधिकारियेां को मिले सजा संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा की जब भी सेंट्रल मार्केट में प्रतिष्ठान बनें और चल रहे थे वह सभी आवास विकास के अधिकारियों की मिली भगत से चल रहे थे। अगर मेरा व्यापारी दोषी है तो क्या वो अधिकारी दोषी नहीं है जिन्होंने यहां यह सब कुछ बनाने दिया। दोनों ने अगर अनैतिक काम किया है तो सजा भी दोनों को मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के खिलाफ बराबर कारवाई की बात कही लेकिन वो अधिकारी जिनके कार्यकाल में सहमति होने के बाद यह सब हुआ वह सभी आज भी छूटे घूम रहे हैं। व्यापारी आज उजड़ गया है लेकिन उनके खिलाफ करवाई क्यों नहीं जिनकी सहमति पर यह सब हुआ। बच्चों का स्कूल भी नहीं बचा सेंट्रल मार्केट में दुकान पर सील की कार्रवाई होने के बाद इंद्रा ने बताया कि पहले ध्वस्तीकरण में एक दुकान ध्वस्त हो गई थी जिसके बाद कर्जा लेकर दूसरी जगह दुकान शिफ्ट की थी। 6 महीने पहले जो रोजगार टूट गया था, उसे कैसे-कैसे जोड़ा था। पास ही में एक स्कूल में 2 दिन पहले ही 40000 रूपये जमा कर बच्चे का एडमिशन कराया था, आज उस स्कूल पर भी सील लग गई है। हमारे पास रोजगार करने के लिए जो दुकान थी, वह तो बंद हो ही गई है। साथ ही बच्चे को पढ़ने के लिए जो स्कूल था, उस पर भी ताला लग गया है। बीपी और शुगर की बीमारी है इसके लिए तबीयत खराब होने पर नजदीकी अस्पताल में चले जाते थे। लेकिन वहां भी अब ताला लग गया है। जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। अब जानिए क्या कहना है आवास विकास का आवास विकास के डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि 70 करोड़ रूपया जो बताया जा रहा है वह सिर्फ एक अफवाह है। जिन 80 लोगों द्वारा भू उपयोग बदलने का आवेदन था उनमें से 29 लोगों ने 15,54,46,340 रूपया जमा किया गया है। इसके अलावा जो 44 संपत्तिया सील हुई हैं उनमें से केवल 7 लोगों ने पैसा जमा किया था जो कुल 5 करोड़ दो लाख। आज कोर्ट ने सीलिंग की रिपोर्ट देखने के आद नरमाई दिखाते हुए कहा कि सेटबैक तो सभी को तोड़ना पडेगा । इसमें भी पहले सभी को नोटिस देकर परिषद द्वारा बताया जाए कि किसको कितना हिस्सा तोडना है। कुछ लोग जिनके प्रतिष्ठानों पर सीलिंग हो गई है वह अफवाह फैला रहे हैं कि सारा तोड़ा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है सिर्फ सेटबैक वाला ही तोडना है। इसके साथ ही कोर्ट ने आवास विकास को कहा है कि आप अपनी पॉलिसी के हिसाब से रिपोर्ट दीजिए कि आप इसमें क्रूा चाहते हैं। इसमें हम हमारे परिषद की पॉलिसी के अनुसार एक रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में देंगे।
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