जहां एक ओर समाज के कई हिस्सों में आज भी बेटियों के जन्म पर कम उत्साह देखने को मिलता है, वहीं शहर के एक परिवार ने इस सोच को बदलते हुए बेटी के जन्म को त्योहार की तरह मनाकर नई मिसाल पेश की है। गुलाबी गुब्बारों से सजी दो कारें जब सड़क पर निकलीं और उन पर ‘बेटी हुई है’ के पोस्टर लगे नजर आए, तो राहगीर ठहर गए। परिवार ने सिर्फ सड़क पर जश्न ही नहीं मनाया, बल्कि घर को भी गुलाबी गुब्बारों और फूलों से सजाया गया। ‘वेलकम’ लिखकर बेटी का भव्य स्वागत किया गया, फीता काटकर गृह प्रवेश कराया गया और नन्हीं बेटी के पहले कदमों की छाप लेकर इस पल को यादगार बना दिया गया। खरखौदा क्षेत्र के गांव बिजौली निवासी कमल सिंह, जो खानपुर के जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक हैं, ने बताया कि उनके बेटे शुभम खटाना की शादी 14 दिसंबर 2024 को प्रियंका से हुई थी। पांच अप्रैल को प्रियंका ने पीवीएस मॉल के पास स्थित डॉ. सुधा स्वरूप नर्सिंग होम में बेटी को जन्म दिया। सुबह से ही अस्पताल और घर में खुशी का माहौल रहा। शुभम अपनी पत्नी और नवजात को घर लाने के लिए खास अंदाज में सजी कारों के साथ पहुंचे और बेटी का स्वागत पूरे उत्साह के साथ किया। पिता शुभम ने कहा, “हमारे लिए बेटी और बेटा समान हैं। हमारे घर लक्ष्मी आई है, इसलिए हमने इसे उत्सव की तरह मनाया।” कमल सिंह का कहना है कि शिक्षा ने उनके परिवार की सोच को सकारात्मक बनाया है। उन्होंने कहा कि आज बेटियां पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार आगे बढ़ रही हैं, जिससे समाज की सोच भी बदल रही है। उन्होंने कहा की जहां लोग पहले बेटी होने पर संकोच करते थे, वहीं हमने गर्व से सबको बताया कि हमारे घर बेटी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा की जब किसी घर में बेटी होती है तो लोग बहुत शर्म से बताते है लेकिन हम बहुत खुश है की हमारे घर लक्ष्मी आई है इसलिए हमने पोस्टर लगवा कर सबको बता दिया की हमारे यहां बेटी हुई है परिवार ने नवजात का नाम ‘प्रिशा’ रखा है। शुभम के अनुसार, यह संस्कृत मूल का नाम है, जिसका अर्थ “ईश्वर का उपहार”, “प्रिय” और “प्यारी” होता है। यह नाम सकारात्मकता, स्नेह और दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। यह पहल न केवल एक परिवार की खुशी का प्रदर्शन है, बल्कि समाज में बेटियों को लेकर बदलती सोच और सकारात्मक बदलाव को भी दर्शाती है।
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