देवरिया में अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की मौत के मामले में प्रदेश सरकार ने बरहज के एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी को निलंबित कर दिया है। शासन ने प्रथमदृष्टया लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए हैं। यह मामला बरहज तहसील के ग्राम लक्ष्मीपुर से जुड़ा है। यहां राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाली और नलकूप की जमीन पर पक्की सड़क के निर्माण को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान एसडीएम और बरहज तहसील के अधिवक्ता के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि एसडीएम की फटकार के बाद अधिवक्ता को दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद मामले की प्रारंभिक जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इसमें अपर आयुक्त प्रशासन गोरखपुर, पुलिस अधीक्षक नगर गोरखपुर और अपर जिलाधिकारी नगर गोरखपुर शामिल थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में एसडीएम की भूमिका को प्रथमदृष्टया संदिग्ध मानते हुए उन्हें लापरवाही का जिम्मेदार बताया। समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने नियम-7 के तहत विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच के लिए प्रयागराज मंडल के कमिश्नर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान विपिन कुमार द्विवेदी को राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले को गंभीरता से लिया गया है। आगे की जांच तेजी से कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी आक्रोश देखा गया था, जिसके बाद सरकार ने यह त्वरित कदम उठाया है। कैसे हुआ विवाद और मौत
मामला ग्राम लक्ष्मीपुर का है, जहां राजस्व अभिलेख में दर्ज नाली और नलकूप की जमीन पर पक्की सड़क निर्माण को लेकर विवाद चल रहा था। रविवार को जमीन की पैमाइश के दौरान एसडीएम और अधिवक्ता विजेंद्र सिंह के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। परिजनों का आरोप है कि एसडीएम की फटकार और अभद्र व्यवहार के कारण विजेंद्र सिंह को दिल का दौरा पड़ा और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। परिजनों का विरोध और आरोप
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने शव को तहसील परिसर में रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंने एसडीएम को मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की। मृतक के बेटे सिद्धार्थ सिंह ने आरोप लगाया कि पैमाइश के दौरान हुए विवाद में एसडीएम द्वारा अभद्रता की गई, जिससे उनके पिता मानसिक रूप से आहत हुए और उनकी जान चली गई। अधिवक्ता वर्ग में आक्रोश
इस घटना से स्थानीय अधिवक्ता समुदाय में भारी रोष देखने को मिला। अधिवक्ता उदय राज चौरसिया समेत कई लोगों ने इसे प्रशासनिक दबाव और अनुचित व्यवहार का मामला बताया। तहसील परिसर में नारेबाजी भी हुई और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई। जांच और पुलिस कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसमें अपर आयुक्त प्रशासन, एसपी नगर गोरखपुर और एडीएम नगर शामिल रहे। समिति की रिपोर्ट में एसडीएम की भूमिका संदिग्ध पाई गई। वहीं, बरहज थाने में ग्राम प्रधान सहित 5 नामजद और 7 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा। आगे की कार्रवाई और स्थिति
शासन ने नियम-7 के तहत विभागीय जांच के आदेश देते हुए प्रयागराज मंडल के कमिश्नर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल रहा, लेकिन प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने का दावा किया है।
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