संभल लोकसभा क्षेत्र के समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने मतदाता सूची से नाम काटे जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम, दलित और पिछड़े समाज के बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे उनके लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने शनिवार शाम 07 बजे संभल के थाना नखासा क्षेत्र स्थित अपने आवास पर मीडिया से बात की। भाजपा के गढ़ वाले इलाकों में अधिक और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कम वोट कटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को एक ‘हथकंडा’ करार दिया। सांसद बर्क ने कहा कि विपक्ष लंबे समय से चुनाव आयोग पर दबाव में काम करने का आरोप लगाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि वोट कटौती का असर सभी वर्गों पर पड़ा है, लेकिन मुस्लिम समाज और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में अधिक वोट काटे गए हैं। जियाउर्रहमान बर्क ने मतदान के अधिकार को प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाता है, तो वह अपने इस अधिकार का प्रयोग कैसे करेगा। सांसद ने इसे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। सांसद ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें तुरंत दोबारा जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि वोट काटने की प्रक्रिया में हुई लापरवाही या पक्षपात की जांच की जाए। सांसद बर्क ने बताया कि चुनाव आयोग के पास अपनी अलग व्यवस्था नहीं होती, बल्कि स्थानीय स्तर पर कर्मचारी ही यह कार्य करते हैं। इसलिए, उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, प्रभावित मतदाताओं के नाम जल्द से जल्द बहाल करने पर जोर दिया।
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