भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम का गठन जल्द हो सकता है। वहीं प्रदेश में आयोग, निगम और बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला भी आगामी सप्ताह से शुरू हो सकता है। प्रदेश भाजपा की नई टीम में करीब तीन साल बाद बदलाव होने जा रहा है। टीम में लंबे समय से जमे पदाधिकारी हटाए जाएंगे वहीं कुछ नए चेहरों को जगह मिलेगी। जानकारी के मुताबिक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद पार्टी अब प्रदेशों में भी नई लीडरशिप तैयार करना चाहती है। इस नीति के मद्देनजर उम्रदराज पदाधिकारियों को सरकार में समायोजित कर पार्टी में नई लीडरशिप तैयार करने की योजना है। प्रदेश टीम के गठन के लिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने दिल्ली में राष्ट्रीय नेताओं से एक दौर की बातचीत की है। कई नामों पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की तैयारी की जा रही है। सरकार और संगठन में पूर्वांचल का पलड़ा भारी होने के चलते अब संगठन में पश्चिम, अवध, बुंदेलखंड और काशी क्षेत्र को भी महत्व मिल सकता है। प्रदेश टीम के गठन, राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सीएम योगी आदित्यनाथ आज शाम मुलाकात करेंगे। जानकारी के मुताबिक बीजेपी के कुछ मौजूदा पदाधिकारियों को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में भी जगह मिल सकती है, जिन्हें राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जाएगा उन्हें प्रदेश से मुक्त कर दिया जाएगा। उधर, प्रदेश में अल्पसंख्यक आयोग, बाल संरक्षण आयोग, किन्नर विकास बोर्ड सहित अन्य आयोग, बोर्ड और निगमों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों का सिलसिला भी आगामी सप्ताह से शुरू हो सकता है। राजनीतिक नियुक्तियों के लिए भी प्रस्तावित नामों पर करीब करीब सैद्धांतिक सहमति बन गई है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश पदाधिकारियों की नियुक्ति और राजनीतिक नियुक्तियों से पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े रविवार को लखनऊ आएंगे। तावड़े नियुक्तियों को लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों से भी रायशुमारी करेंगे। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष व्यापारिक कल्याण बोर्ड में अध्यक्ष पद पर नरवर गोयल की नियुक्ति के बाद विवाद हुआ था। उसके बाद महिला आयोग की सदस्यों की नियुक्ति को लेकर भी नाराजगी दिल्ली तक पहुंची थी। पिछले अनुभव से सबके लेकर पार्टी नेतृत्व ने अब विनोद तावड़े को पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा है, ताकि सभी पक्षों से बातचीत के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।
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