जयपुर में गायक अनूप जलोटा ने कहा- यह शहर मेरे दिल के बेहद करीब है। उन्होंने कहा- जब औरंगजेब मंदिरों को तोड़ रहा था तो मथुरा-वृंदावन से लाकर मूर्तियां जयपुर में संरक्षित की गई, इसलिए यह मेरे दिल के बहुत करीब है।
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मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में शुक्रवार शाम भक्ति संगीत से सराबोर भजन संध्या का आयोजन हुआ। इसमें गायक अनूप जलोटा ने यह कहा।
इस मौके पर गायक अनूप जलोटा ने ‘ऐसी लागी लगन…’ सहित कई भजनों की प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। शाम 7 बजे शुरू हुआ, यह कार्यक्रम देर रात तक चला। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
गुप्त वृंदावन धाम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शहर के संगीतप्रेमी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। पूरे आयोजन के दौरान ऑडिटोरियम में भक्ति, संगीत और श्रद्धा का खास माहौल देखने को मिला, जहां लोग देर तक भजनों में डूबे नजर आए।
कार्यक्रम में अनूप जलोटा ने कई भजन सुनाए।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने हाथ जोड़कर भजन सुने।
‘ऐसी लागी लगन’ पर झूमे श्रोता, गूंजे भक्ति के स्वर
कार्यक्रम में अनूप जलोटा ने ‘ऐसी लागी लगन…, मीरा हो गई मगन…’ ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण, हरे राम हरे राम…’, दुनिया चले न श्रीराम के बिना, राम जी चले न हनुमान के बिना… जैसे कई लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति दी। जैसे ही उन्होंने मंच संभाला, दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया। भजनों के दौरान श्रोता झूमते नजर आए और कई बार उनके साथ सुर भी मिलाते दिखे, जिससे पूरा माहौल और भी जीवंत हो गया।
जयपुर मेरे घर जैसा, भक्त और भगवान के बीच कड़ी भजन
अनूप जलोटा ने कहा- जयपुर गोविंद की नगरी है और वे सालों से यहां आ रहे हैं। कई बार यहां भजनों की प्रस्तुति दे चुके हैं और उन्हें यह शहर अपने घर जैसा लगता है। उन्होंने बताया- भजन भक्त और भगवान के बीच जोड़ने की कड़ी का काम करता है।
उन्होंने इस्कॉन से अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र करते हुए बताया- वे करीब 50 सालों से इससे जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि संस्था सेवा के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। चाहे वह गौसेवा हो या अन्य सामाजिक कार्य, हर क्षेत्र में इसका योगदान उल्लेखनीय है।