SHO ने 7 महीने की गर्भवती से की मारपीट:वकील बोले-क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं, फिर भी पीटा; हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मी से पूछा- आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों न हो?




जोधपुर में पुलिसकर्मी ने 7 महीने की गर्भवती को घर से उठाया। इसके बाद थाने ले जाकर मारपीट की। ये पुलिसकर्मी माता का थान थाने का एसएचओ है। मामले में राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर मुख्यपीठ के जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने राज्य सरकार के सरकारी वकील को संबंधित थानाधिकारी से एफिडेविट पेश करवाने का निर्देश दिया है। एफिडेविट में स्पष्टीकरण हो कि ‘उनके (SHO) खिलाफ पर्याप्त आदेश क्यों न पारित किए जाएं।’ मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की गई है। पढ़िए- पूरा मामला वकील बोले- न कोई आरोप, न केस दर्ज, फिर भी की मारपीट SHO पर महिला ने आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। महिला के वकील योगेंद्र कुमार शर्मा ने कोर्ट को बताया कि मामला 28 फरवरी का है। इस दिन रात 9 बजे के बाद माता का थान एसएचओ शफीक मोहम्मद महिला के घर पर पहुंचे थे। घर से महिला और उसके नाबालिग भाई को उठाकर पुलिस की गाड़ी में डालकर थाने ले गए थे। महिला और उसके भाई से रास्ते में और थाने ले जाकर मारपीट की गई थी। महिला तब 7 महीने की गभर्वती थी। थाने में रात को उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। तब SHO ने उसे सड़क पर छोड़ दिया। इन आरोपों की पुष्टि के लिए याचिका के साथ कुछ दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए गए हैं। किसी भी महिला को रात को पुलिस कस्टडी में लेने और उसके साथ मारपीट करने के गंभीर आरोपों का पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। मामले को लेकर अब तक 2 सुनवाई 1- पुलिस का पक्ष कोर्ट को बताने के निर्देश मामले की सुनवाई दो चरणों में हुई है। पहली सुनवाई (6 अप्रैल) में जस्टिस फरजंद अली ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी को नोटिस की एक प्रति सौंपने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने संबंधित थानाधिकारी से बात करने को कहा था। इसके साथ ही याचिका में लगाए गए आरोपों के संबंध में पुलिस का पक्ष जानकर कोर्ट को बताने का निर्देश दिया गया था।
2- सरकारी वकील को हलफनामा पेश करने का निर्देश दूसरी सुनवाई (16 अप्रैल) के दौरान राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील सुरेंद्र बिश्नोई पेश हुए। कोर्ट ने महिला के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को बेहद गंभीरता से लिया। कोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वे संबंधित थानाधिकारी से हलफनामा पेश करवाएं, जिसमें स्पष्टीकरण हो कि ‘उनके खिलाफ उचित आदेश पारित क्यों न किया जाए।’ कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी स्टे याचिका का निस्तारण कर दिया है और स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ी, तो मुख्य याचिका में ही अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा। हिस्ट्रीशीटर की पत्नी है महिला महिला माता का थान के हिस्ट्रीशीटर की पत्नी है। हिस्ट्रीशीटर पर किसी को धमकी देने के आरोप होने की बात सामने आ रही है।



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