एक्सपर्ट की चेतावनी: टेक्नोलॉजी बदल रही आतंक-अपराध के तरीके:दूर बैठे घर के डिवाइस हैक, कार के ब्रेक फेल कर सकते हैं अपराधी




कल्पना कीजिए, एक अपराधी को किसी की हत्या करनी है। उसे अब बम या शार्पशूटर की जरूरत नहीं है। वह दूर बैठकर उस व्यक्ति के घर के स्मार्ट डिवाइस (आईओटी) को हैक कर सकता है, कार के ब्रेक फेल कर सकता है, या सस्ता ड्रोन भेजकर हमला कर सकता है। 3डी प्रिंटिंग ने तो और भी कमाल कर दिया है; अपराधी अड्डों पर ही घातक राइफलें ‘प्रिंट’ कर रहे हैं, जिससे हथियारों की तस्करी व उनके पकड़े जाने का डर खत्म होता जा रहा है। यह कहानी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी लग सकती है, पर यह भविष्य की कड़वी हकीकत है। दशकों से आतंकी व अपराधी गिरोहों की ताकत उनके कब्जे वाली जमीन से मापी जाती थी- जैसे तालिबान या मैक्सिकन कार्टेल। अगले दो दशक में यह सब बदलने वाला है। अब अपराध को न जमीन चाहिए, न बहुत सारे लड़ाके; उसे तो बस ‘डेटा’ व ‘टेक्नोलॉजी’ चाहिए। ब्रुकिंग ​इंस्टिट्यूशन के स्ट्रोब टैलबॉट सेंटरमें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व संघर्ष मामलों की एक्सपर्ट वांडा ब्राउन बताती हैं,‘पहले अफीम या कोकीन उगाने के लिए मीलों लंबी जमीन चाहिए होती थी, पर अब सिंथेटिक ड्रग्स छोटे से बेसमेंट में बन जाती हैं। अपराधियों को वसूली के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। एआई-स्कैम्स, रैनसमवेयर व क्रिप्टोकरेंसी के जरिए वे घर बैठे खरबों डॉलर्स की कमाई कर रहे हैं। ‘शक्ति’ का केंद्र अब भौगोलिक नक्शा नहीं, बल्कि डिजिटल सर्वर बन गया है। वांडा कहती हैं,‘पहले किसी शहर पर कब्जा करने के लिए हजारों सैनिकों की जरूरत होती थी। पर अब ड्रोन स्वार्म्स और ऑटोमेटेड साइबर अटैक के जरिए मुट्ठी भर लोग पूरे शहर की बिजली और पानी ठप कर उसे बंधक बना सकते हैं। अपराध अब मेहनत वाला नहीं, बल्कि ‘टेक्नोलॉजी’ वाला हो गया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि आने वाले समय में सबसे बड़ी लड़ाई डेटा की होगी। जो गिरोह सरकार के सिस्टम में सेंध लगाकर डेटा चुरा सकेगा या उसमें छेड़छाड़ कर सकेगा, जीत उसी की होगी। सबसे बड़ा अपराधी वह होगा जिसके पास सबसे ज्यादा ‘डेटा एक्सेस’ है। पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती यह है कि वे इन अपराधियों को पकड़ने के लिए जिस सर्विलांस तकनीक का उपयोग करेंगे, कहीं वह नागरिकों की निजता व मानवाधिकारों का हनन न करने लगे। हैकर्स की टीम के साथ घर में सेंध लगा सकते हैं अपराधी स्ट्रोब टैलबॉट सेंटर में सीनियर रिसर्च असिस्टेंट डायना गार्सिया कहती हैं, ‘अपराध और आतंकवाद का चेहरा अब ‘खून-खराबे वाली जमीन’ से हटकर ‘साफ-सुथरे डेटा सेंटर्स’ की ओर मुड़ रहा है। यह तकनीक और सुरक्षा के बीच एक ऐसी दौड़ है, जहां जीत उसी की होगी जो डेटा को नियंत्रित करना और उसे सुरक्षित रखना जानता हो। भविष्य का अपराधी एक ‘हैकर्स’ की टीम के साथ आपके बेडरूम तक पहुंच सकता है, और यही आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *