डालीगंज घाट पर सूरदास जयंती मनाई:भक्ति और संगीत से सजी शाम, कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां




भक्ति और सुरों की मधुर संगत के बीच मंगलवार को डालीगंज के लल्लूमल घाट पर भक्त कवि सूरदास जयंती बड़े ही भावपूर्ण अंदाज़ में मनाई गई। लोक संस्कृति शोध संस्थान की लोक चौपाल में जुटे लोगों ने सूरदास के पदों और उनकी भक्ति परंपरा को याद करते हुए एक सांस्कृतिक शाम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत देव आवाहन के साथ हुई। चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता ने माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। इसके बाद संस्थान के अध्यक्ष जीतेश श्रीवास्तव ने सूरदास के जीवन और उनके रचनाकर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आज भी लोकमन को जोड़ने का काम करती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता चौपाल चौधरी विमल पन्त ने की। कलाकारों की टोली ने ‘हरि हरि हरि सुमिरन करो’ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। निवेदिता भट्टाचार्य के निर्देशन में बच्चों और कलाकारों की टोली ने ‘हरि हरि हरि सुमिरन करो’ और ‘प्रभु जी मेरो अवगुन चित्त न धरो’ जैसे भक्ति पदों की सामूहिक प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं भूमि पाण्डेय और परी सिंह ने ‘राधा राधा’ गीत पर मनमोहक नृत्य पेश कर तालियां बटोरीं। लोक गायन की श्रृंखला में वरिष्ठ गायिका नीरा मिश्रा ने ‘यशोदा हरि पालने झुलावें’ गाकर वातावरण को कृष्णमय बना दिया। बबिता साहू, रीता पांडेय और अलका चतुर्वेदी ने भी अपने-अपने भजनों से भक्ति रस घोला। अरुणा उपाध्याय और शशि कुकरेजा की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। भक्ति, संगीत और संस्कृति का दिखा संगम कार्यक्रम में कई अन्य कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधा। इनरव्हील क्लब की अध्यक्ष शिखा राज सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।अंत में संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी ने सभी कलाकारों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। भक्ति, संगीत और संस्कृति के संगम ने इस आयोजन को खास बना दिया, जहां हर कोई सूरदास की भक्ति में डूबा नजर आया।



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