बुधवार को दिल्ली के लिए रवाना होगी पैदल न्याय यात्रा:रात्रि विश्राम के लिए तीन स्पॉट किए गए निर्धारित, 18 अप्रैल की सुबह सोपेंगे ज्ञापन




सेंट्रल मार्केट के लोगों के समर्थन में निकाली जाने वाली पैदल न्याय यात्रा बुधवार यानी 15 अप्रैल की सुबह दिल्ली के लिए कूच करेगी। यात्रा जगह-जगह रुककर दिल्ली पहुंचेगी, जिसके लिए तीन स्पॉट रात्रि विश्राम हेतु तैयार किए गए हैं। मंगलवार को आयोजन पूरी रणनीति साझा करेंगे। पहले एक नजर डालते हैं मामले पर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेंट्रल मार्केट के 44 प्रतिष्ठानों को सील किया गया है। यह सभी आवासीय क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधि के कारण सील किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 15 दिन के भीतर इन प्रतिष्ठानों की कमर्शल गतिविधियों को पूर्ण रूप से बंद करते हुए, सेट बैक का रास्ता खुलवाया जाए। सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती से मची खलबली
सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती के बाद पूरे सेंट्रल मार्केट और यहां प्रतिष्ठान चलाने वाले लोगों में खलबली मची है। क्योंकि इन प्रतिष्ठानों में शामिल स्कूल, अस्पताल और बैंक तक सील किए गए हैं, ऐसे में लोगों में नाराजगी साफ दिख रही है। पिछले 4 दिन से सेंट्रल मार्केट में धरना दिया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों से मांग की जा रही है कि वह हस्तक्षेप कर कानून बनवाने का काम करें। पैदल न्याय यात्रा का किया ऐलान
सेंट्रल मार्केट के लोगों के द्वारा पैदल न्याय यात्रा का भी ऐलान किया गया है। सोमवार को इसका पोस्टर भी जारी कर दिया गया। इस यात्रा के अंतर्गत लगभग डेढ़ सौ लोगों का जत्था पैदल ही दिल्ली कूच करेगा। दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर सेंट्रल मार्केट के लोगों के लिए न्याय की मांग करेगा। कुल दो मांगे रखी जाएगी। यह रहेगा पैदल न्याय यात्रा का कार्यक्रम
आयोजन समिति में शामिल हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही ने बताया कि 15 अप्रैल की सुबह 10:30 बजे डेढ़ सौ लोगों का यह जत्था दिल्ली के लिए रवाना होगा। रात्रि में पहले दिन का विश्राम मोदीनगर में होगा। 16 अप्रैल की रात गाजियाबाद में रुका जाएगा। 17 अप्रैल की रात यूपी बॉर्डर पर रुकेंगे और 18 अप्रैल को दोपहर 12 बजे गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। दो प्रमुख मांगों से जुड़ा सोपेंगे ज्ञापन
सचिन सिरोही ने बताया कि पैदल न्याय यात्रा देश के गृहमंत्री अमित शाह को ज्ञापन देगी, जिसमें पहली मांग संसद में सेंट्रल मार्केट के मुद्दे को उठाने और सभी सांसदों द्वारा समर्थन करने की मांग होगी। दूसरी मांग व्यापारियों के लिए देश के वरिष्ठ अधिवक्ता में से एक को खड़ा करने की होगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।



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