महोबा के जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही और अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं।
धरौन गांव निवासी राजबहादुर अहिरवार अपनी गर्भवती पत्नी फूलादेवी को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। गुरुवार शाम करीब 5 बजे फूलादेवी ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के बाद अस्पताल स्टाफ ने उनसे तीन हजार रुपए की अवैध वसूली की। आरोपों के मुताबिक, पैसे न देने पर उचित देखभाल नहीं की गई। बताया जा रहा है कि रात में अचानक नवजात की तबीयत बिगड़ गई और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। परिजनों का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने बच्चे को ऑक्सीजन देने के बजाय उपकरण पिता के हाथ में थमा दिया। राजबहादुर का आरोप है कि डॉक्टर केवल बच्चे को रेफर करने की बात करते रहे, लेकिन समय पर कोई प्रभावी उपचार नहीं किया गया। मेडिकल जानकारी न होने के बावजूद पिता खुद ही बच्चे को ऑक्सीजन देने की कोशिश करता रहा। आखिरकार रात करीब 11:30 बजे नवजात ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है और उन्होंने सीधे तौर पर अस्पताल की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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