हरदोई के शहर के श्रीश चंद्र बारात घर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में एक ‘नारी शक्ति सम्मेलन’ शुक्रवार को आयोजित किया गया। इसमें मुख्य अतिथि जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने महिला आरक्षण को देश की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेश ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन 2026’ महज एक संवैधानिक संशोधन नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक सामाजिक क्रांति है। बब्बन ने जोर देकर कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को नीति निर्धारण के केंद्र में लाएगा। उनके अनुसार, जब आधी आबादी विधायी प्रक्रियाओं में निर्णय लेगी, तो शासन में अनुशासन और संवेदनशीलता बढ़ेगी, जिससे राष्ट्र को एक सशक्त और समावेशी आधार मिलेगा। सम्मेलन की अध्यक्षता कीर्ति सिंह ने की, जबकि संचालन जिला उपाध्यक्ष अलका गुप्ता ने किया। महिलाओं को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने 33 प्रतिशत आरक्षण को एक नए युग का सूत्रपात बताया। उन्होंने कहा कि पंचायत से संसद तक एक नया सवेरा होने जा रहा है और पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है। उन्होंने 73वें और 74वें संविधान संशोधन का उल्लेख किया, जिन्होंने गांवों की पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देकर जमीनी स्तर पर नेतृत्व की पौध तैयार की थी। सम्मेलन में मौजूद विशिष्ट अतिथि अनुपमा सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे विषयों पर महिलाओं का अनुभव नीतियों को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को तब तक प्राप्त नहीं किया जा सकता, जब तक आधी आबादी नेतृत्वकारी भूमिका में न हो। यह आरक्षण महिलाओं को विकास की लाभार्थी से हटाकर ‘विकास की संचालक’ के रूप में स्थापित करेगा। इस कार्यक्रम में पूनम, मधुबाला गुप्ता, रीना गुप्ता, निधि सिंह, अनुराधा मिश्रा, सुहाना जैन, सुमन सिंह, नेहा कश्यप और मंजू सिंह सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
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