राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. खानू खान बुधवाली ने कहा- वक्फ बोर्ड विकास में हमेशा सहयोग करता रहा है और आगे भी करेगा। अगर वक्फ की जमीन विकास कार्य में ली जाती है तो उसकी स्वीकृति बोर्ड से ली जानी चाहिए। डॉ. बुधवाली रविवार देर शाम उदयपुर पहुंचे। पत्रकारों से बातचीत में कहा- उदयपुर के देहलीगेट पर वक्फ की संपत्ति पर दुकानें निगम ने सीज की थीं। अब उसका इस्तेमाल एलिवेटेड रोड निकालने के लिए किया जा रहा है, लेकिन निगम ने अब तक वक्फ बोर्ड को जानकारी नहीं दी है। अगर दुकानों को अवैध मानकर सीज किया गया, तो 40 साल पहले जब दुकानें बनीं, तब तत्कालीन अधिकारियों ने क्यों नहीं रोका? पूर्व में भी देहलीगेट को चौड़ा करने के लिए वक्फ की जमीन ली गई थी, जिसका मुआवजा आज तक नहीं दिया गया है। अब एलिवेटेड रोड के लिए भी यदि निगम विधिवत रूप से अनुमति मांगता है, तो वक्फ बोर्ड उस पर विचार करेगा और मुआवजे को लेकर अपनी बात रखेगा। उदयपुर में वक्फ की शत-प्रतिशत संपत्ति स्वीकृत डॉ. बुधवाली ने कहा कि प्रदेश में कई जगहों पर वक्फ की संपति को टारगेट किया जाता है, जो गलत है। वक्फ की संपत्ति दान की संपत्ति है। लोग इसे अल्पसंख्यक की जमीन समझ लेते हैं जबकि ये सरकार के अधिकार की है। प्रदेश में वक्फ बोर्ड की 17 हजार संपत्तियों को स्वीकृत किया जा चुका है, जबकि करीब 2 हजार संपत्तियों के संबंध में कोर्ट केस चल रहे हैं, जिनका जल्द ही निस्तारण होना संभव है। उदयपुर शहर में वक्फ की संपत्तियों की शत प्रतिशत स्वीकृति हो चुकी है।
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