पंजाब सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार की एक टीम की तरफ से सोमवार को फरीदकोट जिले की विभिन्न अनाज मंडियों का दौरा कर गेहूं की फसल के सैंपल एकत्र किए गए। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण पंजाब में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। किसानों के अनुसार, फसल में नमी की मात्रा बढ़ गई है और दानों का रंग भी काला पड़ गया है, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिलने को लेकर चिंता बनी हुई है। केंद्रीय टीम ने फरीदकोट और कोटकपूरा मंडियों में पहुंचकर मौके पर फसल की स्थिति का जायजा लिया और सैंपल भी भरे। किसानों ने रखी अपनी समस्याएं इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं और खराब हुई फसल के मद्देनजर राहत देने की मांग की। किसानों ने बताया कि 13 अप्रैल हो जाने के बावजूद अभी तक मंडियों में खरीद शुरू नहीं हो पाई है और केंद्र सरकार को जल्द से जल्द राहत की घोषणा करनी चाहिए। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में केंद्र सरकार से गेहूं खरीद के मानकों में ढील देने की मांग की थी, ताकि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत मिल सके। इसी के तहत केंद्र की टीम को जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए भेजा गया है। टीम की रिपोर्ट पर निर्णय लेगी केंद्र सरकार-डीएफसी इस मामले में जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी(डीएफसी) गुरजीत सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से गेहूं खरीद के मानकों में राहत की मांग की थी जिसके बाद केंद्र की 9 टीमें पंजाब में पहुंची हुई है। इनमें से एक टीम ने जिले की फरीदकोट व कोटकपूरा की पमुख्य मंडियों से गेहूं की फसल सैंपल एकत्र किए हैं। और उनकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा गेहूं खरीद के मानकों के बारे में आगे की कार्रवाई कर निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद है कि केंद्र सरकार पंजाब के किसानों की समस्या को समझते हुए राहत देगी।
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