‘इस गंदे तालाब के बीच में आंबेडकर जी की मूर्ति लगी है। अधिकारियों को इसे साफ कराना चाहिए। यहां नेता केवल चुनाव में आते हैं। विधायक को अंबेडकर जी के मूर्ति के बारे में पता नहीं है। ये लोग केवल चुनाव में वोट मांगने के लिए आते हैं। उसके बाद गायब हो जाते हैं। ’ ये कहना है, जूही दलित बस्ती के रहने वाले मूलचंद का। मूलचंद की ही तरह इस परेशानी को बताने वाले कई लोग हैं। यह लोग जूही सब्जी मंडी में बबुरिया तालाब में फैली गंदगी और उसकी उनकी अनदेखी से नाराज हैं। दरअसल, कानपुर शहर की किदवई नगर विधानसभा का जूही सब्जी मंडी में बबुरिया तालाब के बीच डॉ. भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा लगी हुई है। इस इलाके की दलित बस्ती में करीब 3000 की आबादी रहती है। यहां 300 घरों में करीब 1000 वोटर हैं। यहां पर तालाब के बीच में 25 साल से डॉ. बीआर अंबेडकर की मूर्ति लगी थी। अब भी है। इस मूर्ति पर हर साल 14 अप्रैल को माल्यापर्ण किया जाता है। इलाके के लोग तालाब में घुस कर मूर्ति पर माला चढ़ाते हैं। हर साल की तरह इस बार भी तालाब में घुस के बाबा साहब की मूर्ति पर माल्यापर्ण करने की तैयारी है। आखिर यह नौबत क्यों है। तालाब की सफाई क्यों नहीं हुई है। यहां के लोग तालाब के बीच में लगी मूर्ति तक पहुंचते कैसे हैं। इन्ही सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… यह 2 तस्वीर देखिए…
दलित विरोधी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न हुई तो पानी में धरना देंगे इस इलाके से सुनील कैनाजिया पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान समय में इनकी पत्नी इस वार्ड से पार्षद हैं। सुनील कनौजिया ने बताया, तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए हमने दो महीने पहले नगर आयुक्त को एक पत्र लिखा था। मांग की थी कि तालाब की जल कुंभी, कीचड़ इत्यादि की सफाई करा दी जाए। आज भी ये लेटर घूम के जोन 3 के कार्यालय में पड़ा है। अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया है। सुनील कनौजिया बताते हैं कि बाबा साहब दलितों के भगवान हैं। जब दलितों के भगवान की ये दशा है, तो दलित बस्तियों की क्या दशा होगी। मुख्यमंत्री योगी जी ने हर विधानसभा में बाबा साहब की मूर्ति लगाने और सौंदर्यीकरण कराने का आदेश भी दिया है। कानपुर नगर निगम आदेशों की अवेहलना करने और मजाक उड़ाने में लगा हुआ है। कल से हम लोग अंबेडकर प्रतिमा के पास पानी के बीच में तख्त डाल के धरना देंगे। जब तक दलित विरोधी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी। तब तक धरना दिया जाएगा। अधिकारियों ने नहीं सुनी, लोगों ने पलायन किया सुनील कनौजिया के मुताबिक ये तालाब 150 साल पुराना है। इस तालाब को 1957 में श्रमदान के अनुसार ये जमीन धोबी समाज को दी गई थी। उसके बाद करीब 200 धोबी समाज के लोग यहां काम करते थे। जब तालाब की स्थिति बदहाल हो गई तो यहां से लोग पलायन कर गए। यहां से पलायन करने वाले लोग अब प्राइवेट नौकरी करने के लिए मजबूर हो गए। मायावती ने भी दलितों के भगवान पर ध्यान नहीं दिया सुनील बताते हैं, मायावती 4 बार मुख्यमंत्री रही हैं, लेकिन उन्होंने भी दलितों के भगवान पर ध्यान नहीं दिया है। बताइए ये ऐसे दल हैं, जो अपने आप को दलितों का मसीहा कहते थे। उस समय दलितों की क्या दशा रही होगी, ये मूर्ति देख कर आप समझ सकते हैं। हमको लगता है, सरकारी आदेश आते हैं। हो सकता है ये आदेश अभी तक उनके (विधायक) के पास नहीं पहुंचा हो। हम 18 वर्षों से लगातार पानी में घुस के बाबा साहब का माल्यापर्ण कर रहे हैं। कल भी करेंगे, क्योंकि बाबा साहब हमारे भगवान हैं। हर साल तालाब में घुसके करते हैं माल्यापर्ण इसी बस्ती में रहने वाले रोहित ने बताया- इस समय तालाब की हालत बहुत खराब है। बाबा साहब की मूर्ति के पास जाने के लिए तालाब में घुस के जाना पड़ेगा। यहां बहुत कीचड़ है। लोग तो अब इसमें कूड़ा फेंकते हैं। इस तालाब के लिए काफी लोगों को सफाई के लिए बोला गया, लेकिन कोई नहीं सुनता है। मंगलवार को हम लोग पानी में घुस के माल्यपर्ण करने के लिए जाएंगे। हम लोग नगर निगम में एप्लीकेशन देते हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। जब भी नगर निगम में जाओ- तो कहते हैं, इस महीने में तालाब में सफाई करवा देंगे। लेकिन कोई कुछ नहीं करता है।
नेता वोट मांगने आते हैं लेकिन करवाते कुछ नहीं हैं जब नेता वोट मांगने के लिए आते हैं, उनसे कहते हैं कि इसको साफ करवा दो। उस समय तो नेता कहते हैं, सफाई करवा देंगे। लेकिन उसके बाद कुछ भी नहीं करवाते हैं। जब ये नेता लोग वोट मांगने के लिए आते हैं तब अपनी शिकायत बताते हैं। तब ये लोग कहते हैं, करवा देंगे। लेकिन कोई कुछ नहीं करवाता है। 25 सालों से पानी में घुस के जाते है अंबेडकर प्रतिमा तक जाने के लिए हम लोग तालाब में घुस के जाते हैं। वहां जाने के लिए बीच में कूड़ा, पत्थर और कीचड़ आता है। हर साल किसी न किसी को चोट लगती है। पिछले साल काफी महिलाओं के आभूषण गिर गए थे। तालाब के चारों तरफ करीब 300 घर हैं। सभी घरों की नालियां तालाब में गिरती हैं। हम लोग इसकी शिकायत पार्षद सुनील कनौजिया से करते रहते हैं। अभी तक इस तालाब में कुछ नहीं हुआ है। हम लोग हर साल की तरह पानी में घुस के माल्यापर्ण करेंगे। हम लोग 25 सालों से पानी में घुस के जा रहे हैं। हमारी पूरी जिंदगी बीतने की है, किसी नेता ने माल्यापर्ण नहीं किया है। यहां केवल अधिकारी देखने के लिए आते हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं करवाता है। विधायक जी को पता ही नहीं- यहां अंबेडकर जी हैं
चुनाव के समय जब नेता वोट मांगने के लिए हैं तो उनको अपनी समस्या बताते हैं। वो कहते है, जीत जाएंगे तो कराएंगे। जब ये लोग जीत जाते हैं तो उसके बाद हम लोगों को ढूंढ़ना पड़ता है। हम लोग बताओ किस-किसको ढूंढ़ें। सांसद रमेश अवस्थी को ढूंढ़ें या किसी और को ढूंढ़ें। हमारे विधायक का नाम महेश त्रिवेदी है, वो दो बार से लगातार विधायक बन रहे हैं। हम लोग कभी उनके पास नहीं गए। हो सकता है, उनको पता न हो, यहां पर अंबेडकर जी हैं। हमारी प्रशासन से मांग है। इसकी सफाई हो जाए। यहां बढ़िया पानी भर जाए, जिससे हम लोगों को कपड़े धोने में आराम हो जाएगा और जानवरों के लिए पीने का पानी हो जाएगा। इस समय इसका पानी जानवर पिएगा तो उसका नुकसान होगा।
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