डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर समावेशी समाज की मजबूत तस्वीर सामने आई। स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि समान अवसर और अवसर की समानता ही बाबा साहेब के विचारों का मूल है। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने बताया कि यदि किसी पिछड़े या कमजोर व्यक्ति को सही माहौल और शिक्षा प्रदान की जाए, तो वह बड़ी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, बल्कि शिक्षक की जिम्मेदारी होती है कि वह उसे सही दिशा प्रदान करे। उन्होंने बाबा साहेब के गुरु का उदाहरण दिया, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ने की राह दिखाई। दिव्यांग विद्यार्थियों में अद्भुत प्रतिभा होती है कुलपति ने विश्वविद्यालय के समावेशी मॉडल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां दिव्यांग और सामान्य विद्यार्थी एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हैं। सभी को समान अवसर प्रदान किए जाते हैं, जो वास्तविक समावेशी शिक्षा का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि दिव्यांग विद्यार्थियों में अद्भुत प्रतिभा होती है, जिससे प्रभावित होकर देश-विदेश के लोग भी विश्वविद्यालय का भ्रमण करने की इच्छा व्यक्त करते हैं। बाबा साहेब के बहुआयामी योगदान पर विस्तृत चर्चा हुई विश्वविद्यालय अन्य संस्थानों को भी इस मॉडल से जोड़ने के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बहुआयामी योगदान पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कुलपति ने रेखांकित किया कि उन्होंने न केवल भारत का संविधान तैयार किया, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हिंदू कोड बिल भी प्रस्तुत किया। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), दामोदर घाटी परियोजना, योजना आयोग, वित्त आयोग और चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दिव्यांग विद्यार्थियों ने भी अपने विचार साझा किए और बाबा साहेब के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
Source link