शहर में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बाइक रैली निकालकर सरकार से अपनी मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। बाइक रैली की शुरुआत बीएसए कार्यालय से हुई। यह रैली घंटाघर, कचहरी रोड और ईशन नदी तिराहे से होते हुए कलक्ट्रेट पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान शिक्षक हाथों में बैनर और तख्तियां लिए लगातार नारेबाजी करते रहे, जिसमें टीईटी अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग प्रमुख थी। रैली में शामिल शिक्षकों का कहना था कि सेवारत शिक्षकों पर टीईटी लागू करना उनके वर्षों के अनुभव और सेवा का अपमान है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संयोजक केपी सिंह और जिला संरक्षक सत्यवीर सिंह ने बताया कि शिक्षक लंबे समय से यह मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुजीत चौहान ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाना अनुचित है। वहीं, अटेवा के जिला संयोजक सुनील सिंह ने इसे 20 साल बाद किसी शिक्षक की परीक्षा लेकर उसके समर्पण और योगदान का मजाक बताया। विधेयक लाकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की एससी-एसटी बेसिक टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष करन सिंह ने जोर देकर कहा कि शिक्षकों की एकजुटता सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति बेसिक शिक्षक एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नरेंद्र कुमार सिंह ने सरकार से संसद में विधेयक लाकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की। टीएससीटी के जिला संरक्षक अवधेश गौतम ने कहा कि जब न सरकार सुन रही है और न ही न्यायिक स्तर पर राहत मिल रही है, तो आंदोलन ही एकमात्र विकल्प बचता है। इस प्रदर्शन में महेंद्र प्रताप सिंह, कप्तान सिंह, कौशल गुप्ता, शंकर चौहान, डॉ. नीतू यादव, जितेश, विनय सिंह, किरण शाक्य, शैलजा राठौर, प्रमोद कठेरिया सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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