राजस्थान के शिक्षा विभाग ने सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी के रहने वाले राजनीति विज्ञान के स्कूल लेक्चरर दीपक शर्मा को दहेज लेने के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। दीपक के खिलाफ पत्नी वंदना शर्मा ने शिकायत की थी।
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दीपक पर शादी में दहेज लेने और सरकारी सेवा में जॉइनिंग के समय विभाग को गुमराह करने के लिए गलत शपथ-पत्र (एफिडेविट) देने का आरोप है। वंदना ने पिछले साल सवाईमाधोपुर जिले के कुंडेरा थाने में भी दीपक और उसके परिवार वालों पर दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करवाया था। चार्जशीट के बाद फिलहाल मामला CJM कोर्ट सवाई माधोपुर में विचाराधीन है और सभी आरोपी जमानत पर हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि कोर्ट में विचाराधीन मामले में फैसले से पहले शिक्षा विभाग ने दीपक शर्मा को दोषी कैसे मान लिया? इस सवाल का जवाब जानने के लिए भास्कर ने मामले की पड़ताल की।
सबसे पहले जानिए क्या है मामला?
पालड़ी गांव की वंदना शर्मा ने कुंडेरा थाने में 10 जुलाई 2025 को पति दीपक शर्मा, उसके माता-पिता व बहनों सहित 9 के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व मारपीट का मामला दर्ज कराया था। वंदना ने एफआईआर में शादी, सगाई और अन्य खर्च व दहेज मिला कर कुल एक करोड़ रुपए देने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट में बताया कि 3 मई 2023 को उसकी शादी सवाई माधोपुर के हिल व्यू रिसॉर्ट में दीपक शर्मा के साथ हुई थी।
इससे पहले 28 जनवरी 2023 को सगाई हुई थी। उस समय दीपक, उसकी माता मंजू देवी, पिता रमेश शर्मा, दो अविवाहित ननद सोनिया व राखी, विवाहित ननद रेणु और स्वीटी व इन दोनों के पति भगवान सहाय व राजेश शर्मा ने मुझे और मेरे परिवार को झूठ बताया कि दीपक सरकारी जॉब में है। दीपक उस वक्त एमपी स्टेट की ग्रेड थर्ड की टीचर वेटिंग लिस्ट में था।
इसी तरह के फोटो दीपक और उसके परिवार के दहेज लेने के सबूत बने।
अलग–अलग रस्मों के नाम पर लेते रहे रुपए
वंदना ने रिपोर्ट में आरोप लगाया कि सगाई से शादी के बाद तक सगाई के दौरान दीपक के परिवार वालों ने कच्चे दस्तूर का कहकर दीपक को 51 हजार रुपए, सास-ससुर को 5100-5100 रुपए, नानी को 1100 रुपए व 5-5 हजार रुपए बहनों को दिए।
इस दौरान 1 लाख 10 हजार रुपए में गार्डन बुक किया गया। 51 हजार रुपए का डीजे, हलवाई को 1 लाख रुपए, खाने का सामान 30 हजार रुपए, कपड़े 80 हजार रुपए, घड़ी 12 हजार रुपए, सोने की अंगूठी 35 हजार रुपए व अन्य खर्चा 20 करीब हजार रुपए व मिलनी का खर्चा 30 हजार रुपए मिलाकर कुल 10 लाख रुपए का खर्च दीपक के परिवार ने मेरे पिता प्रेमनारायण शर्मा से करवाया।
घर रिनोवेट कराने के लिए भी पैसे मांगे
आरोप है कि सगाई व शादी के बीच दीपक और उसके परिवार ने घर को रिनोवेट करने के लिए 5 लाख रुपए की अलग से डिमांड की। इस पर वंदना के पिता प्रेमनारायण शर्मा ने उन्हें 5 लाख रुपए नकद दिए। इसके बाद उनसे 30 अप्रैल 2023 को लग्न टीका के कार्यक्रम में करीब 30 हजार रुपए का खर्चा करवाया गया।
इसके बाद टीके की रस्म में दीपक और उसके घरवालों की मांग पर दीपक को 51 लाख रुपए दिलवाए। सामान में 1 लाख रुपए के एलईडी, एयर कंडीशन व अन्य इलेक्ट्रिक व इलेक्ट्रॉनिक सामान, 20 हजार रुपए के बर्तन, 2 लाख रुपए के कपड़े और 16 तोला सोने के गहने दिए गए।
इस दौरान भी मिलनी में 50 हजार रुपए दिलवाए गए। शादी में मैरिज गार्डन, होटल, हलवाई केटरिंग मिलाकर 18 लाख रुपए वंदना के परिवार से दिलवाया गया। इसके अलावा भी डीजे, अगवानी, वीडियो फोटोग्राफी, विवाह के इवेंट्स, कन्यादान, विदाई में कुल 13 लाख रुपए का खर्चा वंदना के परिवार ने किया।
शादी के दौरान दीपक के पिता।
आरोप : ग्रेड फर्स्ट टीचर की पोस्टिंग मिलने पर बदल गया व्यवहार
रिपोर्ट में बताया कि शादी के दूसरे दिन ही दीपक की राजस्थान में प्रथम श्रेणी अध्यापक के पद पर पोस्टिंग हो गई। इसके बाद दीपक और उसके परिवार वालों का व्यवहार बदल गया।
दीपक कहने लगा कि वो दूसरी शादी करेगा। उसने तो माता-पिता व बहनों के दबाव में आकर ये शादी की है। क्योंकि अगर लव मैरिज करता तो मुझे दहेज में कुछ नहीं मिलता। इसके बाद दीपक और उसके परिवार वालों ने वंदना पर तरह-तरह से टॉर्चर स्टार्ट कर दिया।
प्रेग्नेंट होने पर उसके बच्चे को गर्भ में ही मारने का प्रयास किया। उसकी डिलीवरी भी उसके पीहर में हुई। उसे व उसके बच्चे को देखने तक ससुराल से कोई नहीं आया। वंदना को व उसके परिवार वालों से कहा गया कि अगर वो एक करोड़ रुपए देंगे तो ही वंदना को ससुराल में रखा जाएगा।
इस मामले में कुंडेरा थाने के तत्कालीन एसएचओ हरभान सिंह ने जांच की। दीपक शर्मा, उसकी माता मंजू लता और बहन राखी को आरोपी मान 28 अक्टूबर 2025 को CJM कोर्ट सवाई माधोपुर में चार्जशीट पेश कर दी। हालांकि इस मामले में तीनों ही आरोपियों को बिना गिरफ्तारी के ही तत्काल बेल भी मिल गई। फिलहाल ये मामला CJM कोर्ट सवाई माधोपुर में चल रहा है।
अलग-अलग रस्मों के नाम पर सगाई से शादी के बीच लाखों रुपए वसूलने का आरोप है।
शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग में शिकायत
इधर इस पूरे मामले को लेकर वंदना ने दीपक के खिलाफ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर व शिक्षा विभाग में भी शिकायत कर दी गई। 25 सितम्बर 2025 को शिक्षा विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने इस पूरे प्रकरण को VVIP मैटर के तौर पर दर्ज कर लिया और जांच के आदेश दे दिए।
VVIP मैटर का मतलब होता है कि उस केस की खुद मंत्री मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इसका मतलब शिक्षा मंत्री (या उनके ऑफिस) ने इस शिकायत को बहुत गंभीर माना है। ऐसे केस में अधिकारी को भी जल्दी-जल्दी रिपोर्ट देनी पड़ती है। जांच भी बहुत तेज होती है।
यही वजह है कि माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर के निदेशक ने कार्रवाई कर 13 अक्टूबर 2025 को संयुक्त निदेशक कोटा को इस मामले में जांच के आदेश दे दिए। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी झालावाड़ ने 13 नवम्बर 2025 व 12 जनवरी 2026 को दो बार आदेश निकाल भवानी मंडी सीबीईओ को जांच के लिए लिखा। इस दौरान इसे वीआईपी प्रकरण ही बताया गया।
भवानीमंडी CBEO ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बनी झालावाड़ में पोस्टेड दीपक शर्मा और वंदना शर्मा के पक्षों को 15 जनवरी 2026 कोबुलाकर बयान लिए। दोनों ही पक्षों को 5 घंटे एक साथ बैठा कर समझाइश व सुनवाई की।
इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं होने पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया। इसमें अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दामोदर प्रसाद शर्मा व दो प्रिंसिपल भुवनेश पोरवाल व प्रमिला अग्रवाल को शामिल किया गया। जांच कमेटी को 3 दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए।
पुलिस की रिपोर्ट, जिसमें दहेज का सामान जब्त करने का जिक्र किया गया है।
जांच कमेटी के सामने आरोप नकारे
जांच कमेटी के सामने दीपक शर्मा ने बयान देते हुए बताया कि उसने शादी से पहले या शादी के बाद कभी भी कोई दहेज नहीं लिया। उस पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उस पर आचरण सही नहीं रखने व एक स्टूडेंट से मारपीट के जो आरोप ग्रामीणों ने लगाए थे। वो भी शिकायत बाद में ग्रामीणों ने अपनी गलती मानते हुए वापस ले ली थी। उसे शादी के समय ससुराल वालों ने अपनी मर्जी से जो भी उपहार दिए थे, उसे भी उसने वापस थाने में जमा करवा दिया। जिसकी जब्ती लिस्ट भी उसने जांच कमेटी को सौंपी। वो लिस्ट पुलिस चार्जशीट में दर्शाई गई थी।
दीपक के दहेज लेने के 4 सबूत
- पुलिस ने दीपक शर्मा से दहेज के सामान की जब्ती की थी। चार्जशीट में इसकी बाकायदा लिस्ट भी मेंशन की थी। वहीं दीपक ने शिक्षा विभाग की जांच कमेटी के सामने भी इसे पेश किया था। ऐसे में ये प्रमाणित हो गया था कि जब सामान उसने थाने में जमा करवाया हैं तो दहेज लिया गया है।
- विभागीय नियमों के अनुसार, सरकारी सेवा में आते समय कर्मचारी को यह वचन देना होता है कि उसने अपनी शादी में दहेज नहीं लिया है। दीपक कुमार शर्मा ने 1 मार्च 2024 को जॉइनिंग के वक्त शपथ-पत्र दिया था। शपथ-पत्र में लिखा था कि उन्होंने अपनी शादी में कोई दहेज नहीं लिया। शादी की तारीख 3 मई 2023 बताई थी।
- दीपक की पत्नी वंदना शर्मा ने भी कई फोटो और वीडियो एविडेंस दिए, जिनसे दहेज का लेनदेन साबित हो रहा था।
- इसके अलावा इस पूरे मामले में पूर्व में हुए राजीनामे में दीपक ने वंदना के परिवार के सामने एक शर्त रखी थी कि वंदना को पीहर से ससुराल आने पर अपने समस्त गहने और सामान लेकर आना होगा।
(शिक्षा विभाग के निदेशालय में जांच शाखा से जुड़े एक बड़े अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इसी को आधार मानते हुए ब्लॉक स्तरीय जांच कमेटी ने उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अभिशंषा करते हुए जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बाद शिक्षा विभाग निदेशक सीताराम जाट ने दीपक शर्मा को लिखित जवाब पेश करने के आदेश दिए। जवाब से संतुष्ट नहीं होने व जांच में आरोप साबित होने पर 9 अप्रैल 2025 को निदेशक सीताराम जाट ने उसे सस्पेंड कर दिया गया।)
शिक्षा विभाग निदेशक सीताराम जाट का पत्र, जिसमें दीपक शर्मा को दहेज लेने का आरोप माना गया।
अब चूरू मुख्यालय पर देनी होगी उपस्थिति
मामले में दीपक शर्मा का कहना है कि उसे झालावाड़ जिले की लोकल पॉलिटिक्स का शिकार बनाया गया है। भवानीमंडी सीबीईओ कल्याणमल मेघवाल व जांच टीम ने भी पॉलिटिकल प्रेशर में आकर के मेरे खिलाफ झूठी जांच रिपोर्ट पेश की। मैंने अपनी शादी में एक भी रुपए का दहेज नहीं लिया हैं। जो गिफ्ट ससुराल पक्ष ने अपनी मर्जी से दिए वो भी उन्होंने वापस थाने में जमा करवा दिए थे। वहीं मेरा मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन था।
भवानीमंडी सीबीईओ कल्याणमल मेघवाल ने बताया कि कोई पॉलिटिकल प्रेशर नहीं था। शपथ पत्र झूठा दिया और शादी की फोटो में भी थाली में लिए जा रहे नोटों के बंडल साफ़ दिख रहे थे। जांच कमेटी ने 5 महीने तक इन्वेस्टिगेशन किया। दोनों पक्षों से समझाइश की। इसके बाद जांच रिपोर्ट सबमिट की गई थी।
दीपक कुमार शर्मा वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बनी (भवानीमंडी, झालावाड़) में राजनीति विज्ञान के व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे। नियुक्ति के समय से ही इनकी पोस्टिंग झालावाड़ में है। निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय बदल दिया गया है। विभागीय आदेश के अनुसार, निलंबन काल में दीपक कुमार शर्मा का मुख्यालय संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, चूरू निर्धारित किया गया है। उन्हें बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।