कोर्ट ने गलत रिकॉर्ड को शून्य घोषित किया:माता-पिता के अलग रहने से बने दो जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड




भोपाल जिला न्यायालय ने एक अहम फैसले में जन्मतिथि विवाद से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि एक व्यक्ति के दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र मान्य नहीं हो सकते। कोर्ट ने आवेदिका अलवीरा खान की वास्तविक जन्मतिथि 23 दिसंबर 2007 मानते हुए वर्ष 2012 में बने पुराने गलत जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त करते हुए शून्य घोषित कर दिया। मामले में सामने आया कि अलवीरा के माता-पिता के बीच मतभेद थे, जिसके चलते दोनों अलग-अलग रह रहे थे। इसी कारण बचपन में अलवीरा कभी मां के साथ तो कभी पिता के पास रही। इस पारिवारिक स्थिति का सीधा असर उसके दस्तावेजों पर पड़ा और अलग-अलग समय पर अलग जानकारी के आधार पर दस्तावेज बन गए। सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों को देखने के बाद कोर्ट ने 13 मार्च 2012 को जारी जन्म प्रमाण पत्र को शून्य घोषित कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि अलवीरा की वास्तविक जन्मतिथि 23 दिसंबर 2007 ही मानी जाएगी। पिता ने सही जन्म प्रमाण पत्र कैंसिल करवा दिया था कोर्ट ने सामने आया कि अलवीरा के दादा ने उसका दूसरा जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवा दिया था, जिस पर साल 2008 की जन्मतिथि थी। जब उसके दो आधार कार्ड और दो जन्म प्रमाण पत्र अस्तित्व में आए तो तब उसके पिता ने उसका एक आधार कार्ड कैंसिल करवा दिया। जो गलती से साल 2007 का जो उसकी वास्तविक जन्म तिथि है वह कैंसिल हो गया। जब 10वीं की मार्कशीट मिली, तो उसमें उसकी जन्मतिथि 23 दिसंबर 2007 लिखी थी। जिसके बाद पता लगा कि जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड में गलती सुधार करवाना जरूरी है। क्योंकि, बोर्ड की मार्कशीट में कोई बदलाव नहीं हो सकता है। दादा ने बनवा दिया था गलत जन्म प्रमाण पत्र… कोर्ट में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार अलवीरा की मां ने 2007 में वास्तविक जन्मतिथि 23 दिसंबर 2007 के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवाया था। 2012 में जब अलवीरा अपने पिता के साथ रहने लगी, तब उसके दादा ने जानकारी के अभाव में दूसरी जन्मतिथि 10 जनवरी 2008 दर्शाते हुए नया जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवा दिया। इस प्रकार अलवीरा के पास कुल दो जन्म प्रमाण पत्र हो गए। यह स्थिति तब सामने आई जब स्कूल रिकॉर्ड, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों में लगातार 23 दिसंबर 2007 ही जन्मतिथि दर्ज पाई गई।



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