जेपी अस्पताल की ओपीडी में गुरुवार को इलाज के इंतजार में बैठे सुरेश अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। जांच हुई तो पता चला कि वे गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित थे। तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
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किसी अस्पताल का यह पहला मामला नहीं है। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ शहर के सरकारी अस्पतालों में हर 10वां मरीज उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन की शिकायत लेकर पहुंच रहा है। जेपी अस्पताल की 1500 की ओपीडी में करीब 150 और हमीदिया की 2200 की ओपीडी में 200 से अधिक मरीज इसी तरह समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
डॉक्टर इसे बढ़ते तापमान और हीट स्ट्रोक मान रहे हैं। पिछले चार दिन से तापमान 40 डिग्री के आसपास बना हुआ है। गुरुवार को अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान 40 डिग्री पार होने पर शरीर से तेजी से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकलते हैं। इससे असंतुलन होता है और उल्टी, दस्त, चक्कर व कमजोरी जैसी शिकायतें बढ़ती हैं।
डॉक्टर बोले… शरीर का तापमान 104 डिग्री तक पहुंचा, तो किडनी के लिए घातक
स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट तापमान बढ़ने के साथ स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है। जिला अस्पताल से लेकर उपस्वास्थ्य केंद्र तक हीट स्ट्रोक के इलाज की तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में ओआरएस कॉर्नर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की एडवाइजरी सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने अपील की है कि धूप में लंबे समय तक न रहें, सिर और शरीर को ढंककर बाहर निकलें और पर्याप्त पानी पिएं। पसीना अधिक आने पर ओआरएस, लस्सी और फलों का रस लें। चक्कर या घबराहट महसूस होते ही छांव में आराम करें और लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
हीट स्ट्रोक जानलेवा, झटके भी आ सकते हैं... एमडी मेडिसिन डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक, शरीर में पानी की अत्यधिक कमी खतरनाक हो सकती है। गंभीर मामलों में मरीज को झटके आ सकते हैं, यहां तक कि मुंह से झाग भी आ सकता है। बुजुर्गों में घबराहट, मतली और अचानक कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं। हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान 104 डिग्री से अधिक हो सकता है। समय पर इलाज न मिले तो किडनी फेल होने तक की नौबत आ सकती है।