लखनऊ राज्य संग्रहालय में ‘विश्व धरोहर दिवस’ के मौके पर शनिवार को माहौल खास रहा। ‘हमारी धरोहरें, हमारा गौरव’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संग्रहालय परिसर में लगी प्रदर्शनी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों की झलक दिखाकर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम के तहत धरोहरों पर आधारित प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। करीब 300 से ज्यादा बच्चों ने इसमें भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों की पेंटिंग्स में ऐतिहासिक इमारतों, संस्कृति और परंपराओं की खूबसूरत झलक देखने को मिली। नई पीढ़ी को ‘धरोहर’ का सही अर्थ समझाना है राज्य संग्रहालय के निदेशक विनय कुमार सिंह ने बताया कि इस आयोजन का मकसद नई पीढ़ी को ‘धरोहर’ का सही अर्थ समझाना है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी ये धरोहरें सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि हमारी पहचान हैं। इन्हें सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन समय में बनी धरोहरें अद्भुत कला और प्रेम का प्रतीक हैं, लेकिन उन्हें सहेजकर रखना आज की पीढ़ी का कर्तव्य है। अगर हम इन्हें नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से दूर हो जाएंगी। भारत विश्व धरोहर सूची की सूची में छठे स्थान पर है यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इटली जैसे छोटे देश इस सूची में शीर्ष पर हैं, जबकि अमेरिका जैसे देश टॉप-10 में भी नहीं हैं। वहीं भारत इस सूची में छठे स्थान पर है, जो गर्व की बात है। देश में कुल 44 विश्व धरोहर स्थल हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख स्थल भी शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान इन सभी स्थलों की जानकारी देने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिससे बच्चों और आगंतुकों को देश की विरासत के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिला। कार्यक्रम के अंत में सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपनी धरोहरों की रक्षा करेंगे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
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