पुलिस को देख भागा था 66 वर्षीय आरोपी:12 साल पुराने डोडा पोस्त तस्करी मामले में जोधपुर कोर्ट ने सुनाया दो साल का कठोर कारावास




करीब 12 साल पुराने डोडा पोस्त तस्करी मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 66 वर्षीय आरोपी गोरधनराम को दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी घटना के समय पुलिस को देखकर भाग निकला था, लेकिन लंबे समय बाद कानून के शिकंजे में आने पर कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए जेल भेजने के आदेश दिए। जोधपुर महानगर के विशिष्ट न्यायाधीश (एनडीपीएस केसेज नं.1) मधुसूदन मिश्रा की अदालत ने फैसला सुनाया है। तस्कर को मादक पदार्थ रखने और परिवहन करने का दोषी मानते हुए 2 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर मामलों में नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जाता है और अपराधियों में सजा का भय समाप्त हो जाता है। कंधे पर कट्टा रखकर भागने का किया था प्रयास घटना 17 जून 2014 की है। जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के राजीव गांधी नगर पुलिस थाने के तत्कालीन थानाधिकारी कपूराराम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बेरू विश्नोईयों की ढाणी निवासी गोरधनराम अवैध डोडा पोस्त बेचने का धंधा करता है और वह माल लेकर केरू खानियां की तरफ जाने वाला है। पुलिस टीम ने बेरू रोड पर घेराबंदी की, जहां अभियुक्त अपने दाहिने कंधे पर एक सफेद प्लास्टिक का कट्टा लेकर आता दिखाई दिया। पुलिस को देखकर उसने मुड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने उसे पकड़ लिया। तलाशी में उसके कट्टे से 11 प्लास्टिक की थैलियों में भरा कुल 5.250 किलोग्राम अवैध डोडा पोस्त बरामद हुआ, जिसका उसके पास कोई परमिट या लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने मौके पर ही नमूने लेकर सील किए और उसे गिरफ्तार कर लिया। सरकारी वकील ने की सख्त सजा की मांग इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक गोविन्द जोशी ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष से अधिवक्ता आर.के. विश्नोई उपस्थित हुए। अभियोजन ने कोर्ट में कुल 10 गवाह, 23 दस्तावेजी साक्ष्य (एफएसएल रिपोर्ट सहित) और 3 भौतिक वस्तुएं पेश कीं। लोक अभियोजक जोशी ने तर्क दिया कि अवैध मादक पदार्थों से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है और इसका समाज पर प्रतिकूल असर पड़ता है, इसलिए कठोर सजा दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अभियुक्त के बुजुर्ग होने, उसका यह प्रथम अपराध होने और उस पर पूरे परिवार के भरण-पोषण का दायित्व होने का हवाला देकर नरमी की अपील की थी। कोर्ट: आरोपी दोषी करार, 2 साल सजा, 10 हजार अर्थदंड दोनों पक्षों की बहस सुनने और साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि यदि अभियुक्त के प्रति नरमी का रुख अपनाया गया, तो अपराध की पुनरावृत्ति होगी। न्यायाधीश ने अभियुक्त गोरधनराम पुत्र जगरूपराम विश्नोई को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए 2 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को 2 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अभियुक्त द्वारा पूर्व में पुलिस एवं न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी।



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