चित्रकूट की 350 से अधिक पांडुलिपियों का होगा डिजिटाइजेशन:केंद्र के ज्ञान भारतम् मिशन के तहत अभियान शुरू




सतना। धार्मिक महत्व के चित्रकूट के मठ-मंदिरों और आध्यात्मिक स्थलों में उपलब्ध 350 से अधिक हस्तलिखित पांडुलिपियों को संरक्षित करने के साथ-साथ उनका डिजिटाइजेशन किया जाएगा। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ज्ञान भारतम् पांडुलिपि मिशन की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग को सौंपी है। इसी क्रम में शनिवार को एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर और तहसीलदार कमलेश सिंह भदौरिया ने चित्रकूट के धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों में रखी पांडुलिपियों का अवलोकन किया। उन्होंने पौराणिक ग्रंथों से संबंधित जानकारी भी जुटाई। इन पांडुलिपियों की होगी डिजिटाइजेशन
इन पांडुलिपियों में तुलसी शोध संस्थान में महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण के अंश, गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के सात काण्ड, महाभारत के पर्व, हस्तलिखित उर्दू रामायण, श्रीमद्भागवत, दुर्गासप्तशती और श्रीगुरुचारितम जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं। केंद्रीय संस्कृति विभाग द्वारा ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत हस्तलिखित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण एवं डिजिटलीकरण के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 15 जून तक चलेगा, जिसमें देश भर के निजी शोध संस्थानों, कॉलेजों, ग्रंथालयों, मठ-मंदिरों, आश्रमों और प्राइवेट ट्रस्टों में संरक्षित प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों की खोज की जा रही है ताकि उनका डिजिटाइजेशन किया जा सके।



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