राज्यपाल बोले, प्लास्टिक देखते जवानों की छुट्‌टी रोक देता था:ड्यूटी के अनुभव को किया साझा, रक्तदान की अपील भी की; कहा- 1 यूनिट ब्लड जिंदगी दे सकता




बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने रविवार को पर्यावरण को लेकर चर्चा की। उन्होंने प्लास्टिक इस्तेमाल पर चिंचा जताई। कहा कि जब मैं लाइन ऑफ कंट्रोल पर तैनात था, तो वहां प्लास्टिक को लेकर बेहद सख्त नियम थे। अगर कहीं प्लास्टिक का टूकड़ा भी दिख जाता था तो मैं संबंधित जवान की छुट्‌टी रोक देता था। राज्यपाल ने करीब 40 साल तक सेना में सेवा दी है। वहीं, रक्तदान पर भी राज्यपाल ने अपनी बात रखी, उन्होंने कहा कि एक यूनिट ब्लड किसी की जिंदगी बचा सकता है। इसलिए सभी से अपील है कि रक्तदान करें। दरअसल, राज्यपाल पटना के मां वैष्णो देवी सेवा समिति संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। जहां उन्होंने ये सारी बातें कहीं। सालगिरह वाले दिन 51 नवदंपती जोड़ों को देंगे आशीर्वाद राज्यपाल ने संस्थान के कार्यों की सराहना कर कहा कि ऐसे संस्थान समाज को सही दिशा दे रहे हैं। जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बन रहे हैं। राज्यपाल ने संस्थान के समर्पण भाव से किए जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ब्लड बैंक की आवश्यकता और उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने बालासोर ट्रेन हादसे का जिक्र किया, जिसमें 293 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। राज्यपाल ने बताया कि दुर्घटना के दौरान घायलों को समय पर इलाज और पर्याप्त रक्त उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती थी। ओडिशा के लोगों ने एकजुट होकर रक्तदान किया। ये सहायनीय है। ये सामाजिक एकता और मानवता का उदाहरण है। राज्यपाल ने संस्थान की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की भी विशेष सराहना की। राज्यपाल ने चुटीले अंदाज में कहा कि 21 जून को 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह होना है और यह दिन खास है क्योंकि उसी दिन उनकी शादी की सालगिरह है। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा संयोग और क्या हो सकता है कि मैं अपने वैवाहिक वर्षगांठ के दिन इतने सारे नवविवाहित जोड़ों के बीच मौजूद रहूंगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मैं इस आयोजन में शामिल होकर नवदंपतियों को आशीर्वाद दूंगा।
टीबी उन्मूलन, जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

स्वास्थ्य के मुद्दे पर राज्यपाल ने बिहार को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि बिहार आने से पहले नरेंद्र मोदी ने भी इस दिशा में गंभीरता से काम करने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि 2021 में टीबी उन्मूलन का अभियान शुरू किया गया था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसकी गति प्रभावित हुई। 2022 और 2023 में भी यह अभियान अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया, हालांकि 2024 में इसमें कुछ तेजी देखने को मिली है। इसके बावजूद अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है।

राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि टीबी के मरीजों में जागरूकता की कमी एक बड़ी समस्या है। कई मरीज दवाइयों का पूरा कोर्स नहीं करते, जिससे बीमारी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाती और दोबारा उभर जाती है। इस दिशा में समाज और संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। लोगों को यह समझाना जरूरी है कि सही इलाज और नियमित दवा सेवन से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।
ड्रग्स की बढ़ती प्रवृत्ति, युवाओं के लिए गंभीर खतरा

राज्यपाल ने अपने संबोधन में बिहार में बढ़ते नशे (ड्रग्स) के कारोबार पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती थी, लेकिन अब बिहार के युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नशे की लत का मुख्य कारण बेरोजगारी और मानसिक तनाव है। जब युवाओं को सही दिशा और रोजगार नहीं मिलता, तो वे हताशा और निराशा में गलत रास्तों की ओर बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है। राज्यपाल ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे युवाओं को सही दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि परिवार, शिक्षण संस्थान और सामाजिक संगठन मिलकर ही इस समस्या से निपट सकते हैं।
प्लास्टिक मुक्त बिहार, पर्यावरण संरक्षण की जरूरत

पर्यावरण के मुद्दे पर राज्यपाल ने प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग आने वाले समय में मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ‘प्लास्टिक मनुष्यों को खा जाएगा’, अगर इसके उपयोग पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि बिहार में शपथ ग्रहण के बाद जब मैंने लोक भवन का निरीक्षण किया, तो वहां हर जगह प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद आज लोक भवन को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बना दिया गया है, जो एक सकारात्मक बदलाव का उदाहरण है। राज्यपाल ने कहा कि प्लास्टिक न केवल इंसानों बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी काफी घातक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्लास्टिक का उपयोग कम करें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। कार्यक्रम में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों ने भाग लिया

मां वैष्णो देवी सेवा समिति की ओर से पटना के दरियापुर में रविवार को संचालित मां ब्लड सेंटर HLA (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) मैच कैंप का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन की उपस्थिति रही, जिन्होंने पूरे आयोजन का अवलोकन किया और बच्चों को आशीर्वाद दिया। कैंप में बिहार के विभिन्न जिलों से आए 45 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों ने भाग लिया।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए बच्चे बेंगलुरू जाएंगे कार्यक्रम के दौरान नारायण हेल्थ सिटी के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सुनील भट्ट ने थैलेसीमिया की रोकथाम और उपचार पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक जेनेटिक बीमारी है, जिसे समय रहते जांच और जागरूकता के जरिए रोका जा सकता है। साथ ही उन्होंने बोन मैरो ट्रांसप्लांट को इसका प्रभावी इलाज बताया। आयोजकों ने जानकारी दी कि 15 नवंबर 2025 को आयोजित चौथे HLA कैंप में जिन बच्चों का बोन मैरो मैच हुआ था, उनमें से 46 बच्चों की आज स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 44 बच्चे ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाए गए हैं। यह आंकड़ा न केवल सफलता का संकेत है, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण भी है, जो लंबे समय से इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर इन बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की गई है। सभी चयनित बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट भारत सरकार और प्रधानमंत्री राहत कोष के सहयोग से बेंगलुरु स्थित नारायण हेल्थ में कराया जाएगा। कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में शहर के कई प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। आयोजन को सफल बनाने में मनीष जैन, जगजीवन सिंह, नंद किशोर अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, राम मनोहर सिंघानिया, पंकज लुहारुका, अशोक शर्मा और कन्हैया अग्रवाल सहित कई लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समिति के इस प्रयास को समाज में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में मदद कर रहा है, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को नया जीवन देने का काम भी कर रहा है।



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