NIT की छात्रा दीक्षा का बक्सर में अंतिम संस्कार:पिता ने मुखाग्नि दी, कुरुक्षेत्र में हॉस्टल में डेडबॉडी मिली थी, पिता ने हाईलेवल जांच की मांग की




एनआईटी कुरुक्षेत्र की छात्रा दीक्षा का बक्सर स्थित उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके पिता शशि कुमार ने मुखाग्नि दी। परिजनों ने दीक्षा की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दीक्षा के पिता शशि कुमार ने बताया कि 16 अप्रैल की शाम 3:30 बजे उन्हें फोन पर बेटी के आत्महत्या करने की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि दीक्षा हमेशा पढ़ाई में अव्वल रही थी। मैट्रिक, इंटर और जेईई मेन्स में भी उसके अच्छे रैंक थे, जिसकी पुष्टि एनआईटी के बोर्ड सदस्य और प्रोफेसर भी करते थे। छात्राएं भी उससे पढ़ाई में मदद लेती थीं
शशि कुमार ने यह भी बताया कि दीक्षा के साथ रहने वाली छात्राएं भी उससे पढ़ाई में मदद लेती थीं, जिससे स्पष्ट होता है कि पढ़ाई से संबंधित कोई समस्या नहीं थी। उन्होंने पुलिस द्वारा दिखाए गए वीडियो का जिक्र किया, जिसमें दरवाजा तोड़कर दीक्षा को बाहर निकालने की बात कही गई थी। पिता ने कुरुक्षेत्र पुलिस की जांच पर अविश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलने के बाद वे बदहवास थे और उन्हें यह भी याद नहीं कि उन्होंने पुलिस को क्या शिकायत दी है। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में तीन छात्रों ने आत्महत्या की है, लेकिन पुलिस किसी भी मामले में ठोस कारण का पता नहीं लगा पाई है। शशि कुमार ने बक्सर के जिलाधिकारी से कुरुक्षेत्र के डीएम से संपर्क कर किसी एजेंसी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया है। डीएम-एसपी से हाईलेवल जांच की मांग करेंगे
बक्सर के कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने भी दीक्षा की मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बक्सर को दीक्षा से बहुत उम्मीदें थीं कि वह अपनी काबिलियत से जिले और बिहार का नाम रोशन करेगी। उन्होंने बताया कि इस दुखद घटना से पूरा बक्सर गमगीन है और वे जल्द ही बक्सर के डीएम और एसपी से मिलकर उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन की मांग करेंगे। बहुत ही मिलनसार थी दीक्षा दुबे
बक्सर ब्लॉक के उप प्रमुख ओमप्रकाश तिवारी ने कहा कि दीक्षा बचपन से ही मिलन सार थी ,गांव में आने पर गांव की हो जाती थीं। उसके साथ ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी को वह आत्महत्या करेगी।गांव में भी आती तो अपने आसपास के बच्चे उससे सीखने के लिए उसके पास आते थे।इसलिए इसकी जांच निष्पक्षता से होनी चाहिए।



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