दरभंगा शहर के वार्ड संख्या-48 स्थित पंडासराय इलाके में सोमवार को प्रस्तावित प्रशासनिक बुलडोजर कार्रवाई टल गई। प्रशासन की सख्ती और पहले से दिए गए अल्टीमेटम के बाद स्थानीय लोगों ने खुद ही अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया, जिसके कारण बुलडोजर चलाने की नौबत नहीं आई। जानकारी के अनुसार, लोहिया चौक से पंडासराय गुमटी तक करीब 2 किलोमीटर क्षेत्र में सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन ने पूर्व में चेतावनी जारी की थी। ये कार्रवाई NH-527E के निर्माण कार्य दरभंगा को समस्तीपुर जिले के रोसड़ा से जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण के साथ-साथ प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज निर्माण को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट कहा गया था कि यदि अतिक्रमणकारियों ने स्वयं जगह खाली नहीं की, तो बुलडोजर चलाकर मकान और दुकानों को तोड़ा जाएगा। इस चेतावनी के बाद सोमवार सुबह से ही इलाके में दहशत का माहौल था और लोग अपने-अपने स्तर पर अतिक्रमण हटाने में जुट गए। बताया जाता है कि सदर एसडीएम विकास कुमार ने बुलडोजर चलाने का निर्देश जारी किया था,लेकिन लोगों द्वारा स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की पहल के चलते प्रशासनिक टीम मौके पर कार्रवाई के लिए नहीं पहुंची। सरकार की ओर से 40 फीट सरकारी भूमि कराया जा रहा खाली मोहल्ले के निवासी संतोष कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से 40 फीट सरकारी भूमि को खाली कराने का फैसला सही है और उसका उपयोग जनहित में होना चाहिए। लेकिन इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। संतोष कुमार ने बताया कि वर्षों से बने घर और दुकानें अब तोड़ी जा रही हैं, जिससे लोगों की जमा पूंजी पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कई लोग खुद ही अपने स्तर से अतिक्रमण हटा रहे हैं, लेकिन इससे होने वाली क्षति को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल केवल तोड़फोड़ का काम चल रहा है, लेकिन आगे क्या योजना है, जैसे सड़क निर्माण या अन्य विकास कार्य, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रशासन की ओर से नहीं दी गई है। नापी प्रक्रिया को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। संतोष कुमार के अनुसार, “कहीं कुछ नापी हो रही है तो कहीं कुछ और, जिससे भ्रम की स्थिति है। हम लोग चाहते हैं कि खाता-खेसरा के आधार पर सही तरीके से जमीन की मापी हो, ताकि सभी लोग संतुष्ट हो सकें, लेकिन प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पारदर्शिता के साथ मापी कराए और आगे की योजना स्पष्ट करे, ताकि अनिश्चितता और असंतोष की स्थिति समाप्त हो सके। स्थानीय लोगों ने कहा- अतिक्रमण खाली कराना सरकार का अच्छा कदम प्रशांत कुमार के अनुसार, “सरकार द्वारा अतिक्रमण खाली करवाना एक अच्छा कदम है। भले ही अभी लोगों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जब सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया था, तब इसके परिणामों के बारे में नहीं सोचा गया था।” उन्होंने आगे कहा कि इस कार्रवाई से इलाके में सड़क और चौराहे का विकास होगा, जिससे यातायात बेहतर होगा और गाड़ियों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे क्षेत्र की समग्र प्रगति होगी और स्थानीय लोगों को भी भविष्य में इसका फायदा मिलेगा। संजय कुमार ने कहा कि सरकारी जमीन पर जो अतिरिक्त कब्जा था, उसे हटाया जाना सही कदम है और लोग खुद ही उसे खाली कर रहे हैं, ताकि प्रशासन को बुलडोजर चलाने की जरूरत न पड़े। हालांकि, उन्होंने आगे की स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। संजय कुमार के अनुसार, “हम लोगों को सबसे बड़ा सवाल यह है कि घर-दुकान टूटने के बाद इस इलाके का विकास वास्तव में होगा या नहीं। जो सड़क और चौड़ीकरण की बात कही जा रही है, वह पूरा होगा या नहीं—इसको लेकर असमंजस बना हुआ है।” बरसात का मौसम नजदीक, नालियां टूटने से लोगों को होगी परेशानी स्थानीय ने बताया कि बरसात का मौसम नजदीक है और ऐसे में घर व नालियां टूट जाने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। “दो महीने बाद बारिश आ जाएगी, ऐसे में रहने और दैनिक जीवन चलाने में दिक्कतें बढ़ेंगी। संजय कुमार ने यह भी आशंका जताई कि अगर आगे निजी जमीन का भी अधिग्रहण किया गया, तो कई परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो सकता है। “अगर सरकार निजी जमीन भी लेती है, तो हम लोग पूरे परिवार के साथ कहां जाएंगे, यह बड़ी समस्या है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से सरकारी जमीन खाली करने का निर्देश मिलने के बाद लोग खुद ही अपने निर्माण हटा रहे हैं। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम शुरुआत में सही लग रहा है, लेकिन इसका असली मूल्यांकन तभी होगा जब क्षेत्र में वास्तविक विकास कार्य भी नजर आए।
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