फतेहपुर जिले में चाय की एक दुकान पर 16 अप्रैल को फूड डिपार्टमेंट ने छापेमारी की। दुकानदार आर्यन यादव ने दावा किया कि अधिकारियों ने एल्युमिनियम के बर्तन में चाय बनाने पर आपत्ति जताई। अधिकारियों ने कहा कि एल्युमिनियम के बर्तन में चाय बनाना प्रतिबंधित है। ये वही दुकान थी, जहां 20 फरवरी को अखिलेश यादव ने चाय पी थी। जब अखिलेश को छापेमारी की खबर मिली तो उन्होंने आर्यन को लखनऊ बुलाया और पीतल का बर्तन दिया। यहीं से सवाल उठे कि क्या वाकई एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाने से सेहत को नुकसान होता है? इससे कौन-सी बीमारियां हो सकती हैं? इस पर हमने गोरखपुर एम्स में कैंसर डिपार्टमेंड एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शशांक शेखर और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में कैमेस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृपा राम से बात की। भास्कर एक्सप्लेनर में इन्हीं सवालों के जवाब जानेंगे… सवाल. एल्युमिनियम के बर्तन में खाना बनाना कितना नुकसानदायक है और क्यों? जवाब. एल्युमिनियम के बर्तन में खाना पकाने से सेहत को नुकसान होता है। ये कार्सिनोजेनिक यानी कैंसरकारक होता है। आजकल एल्युमिनियम ऑक्साइड की कोटिंग वाले बर्तन भी आ रहे हैं। ये थोड़े कम नुकसानदायक होते हैं। फिर भी जब ये बर्तन हाई टेम्परेचर पर गर्म होते हैं तो उस परत की ‘लीचिंग’ होने लगती है यानी मेटल के कण खाने में घुलने लगते हैं। इस वजह से खाना जहरीला हो सकता है। सवाल. एल्युमिनियम के बर्तन में बना खाना खाने से कौन सी बीमारियां हो सकती हैं? जवाब. एल्युमिनियम न्यूरोटॉक्सिक धातु है, यानी इसका असर इंसान के नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पर होता है। इसका असर 2 तरह से होता है। 1. बर्तन का टेम्परेचर जितना ज्यादा होगा।
2. खाना जितनी ज्यादा देर बर्तन में रहेगा। एल्युमिनियम की लीचिंग उतनी ज्यादा होगी। इसकी मात्रा खाने में मिलने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा ये कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। जैसे कि- किडनी शरीर से टॉक्सिक सब्सटेंस को फिल्टर करके बाहर निकालने का काम करती है। शरीर एल्युमिनियम की थोड़ी मात्रा को मल-मूत्र के जरिए बाहर निकाल देता है, लेकिन एल्युमिनियम सब्सटेंस का हाई लेवल किडनी के काम पर असर डालता है। जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी प्रॉब्लम्स होती हैं, उनके शरीर से एल्युमिनियम बाहर नहीं निकल पाता। इससे हड्डियों और दिमाग में टॉक्सिसिटी (जहरीलापन) बढ़ सकती है। शरीर में कैल्शियम अब्जॉर्ब करने की क्षमता कम हो जाती है और हड्डियों को कमजोर करने वाली बीमारी ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ होने की आशंका बढ़ जाती है। एल्युमिनियम ज्यादा मात्रा में शरीर में जाने से बच्चों के दिमाग के विकास पर असर पड़ सकता है। इससे उनकी याददाश्त, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। यानी दिमाग की प्रोग्रेसिव पावर कम हो जाती है। एल्युमिनियम के बर्तनों का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से अल्जाइमर और डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी हो सकती है। इसके अलावा ये डाइजेशन कमजोर करता है। इसमें डॉक्टर ये क्लियर नहीं कर सकते कि कितने साल तक एल्युमिनियम के बर्तन में खाना खाने से नुकसान नजर आना शुरू होता है। सवाल. क्या खाना पैक करने के लिए एल्युमिनियम फॉइल भी नुकसानदायक है? जवाब. एल्युमिनियम फॉइल, बर्तन से ज्यादा खतरनाक होती है। दरअसल, इसकी लेयर बहुत पतली होती है। इस वजह से लीचिंग ज्यादा होती है। भले ही फॉइल को सीधे गर्म नहीं किया जाता, फिर भी खाने की गर्माहट और भाप की वजह से उसमें लीचिंग होती है। एल्युमिनियम फॉइल एसिडिक फूड (खट्टा) के लिए ज्यादा खतरनाक है। इससे खाने का स्वाद और उसकी क्वालिटी खराब हो सकती है। सवाल. क्या टेट्रा पैकेजिंग और कैन में आने वाली कोल्ड ड्रिंक्स भी नुकसानदायक है? जवाब. आमतौर टेट्रा पैकेजिंग में एल्युमिनियम का इस्तेमाल सेफ माना जाता है, क्योंकि इसमे एल्युमिनियम की बेहद पतली परत (बाल से 8 गुना पतली) का यूज होता है। ये खाने या लिक्विड के सीधे संपर्क में नहीं आती है। टेट्रापैक की इनर लेयरिंग में माइक्रोप्लास्टिक होती है, लेकिन कोल्डड्रिंक्स की कैन में एल्युमीनियम होती है। कैन वाली कोल्ड ड्रिंक्स और जूस ज्यादा नुकसान करते हैं। इसकी वजह ये है कि कोल्डड्रिंक का नेचर एसिडिक होता है। इससे एल्युमीनियम की लीचिंग बढ़ जाती है। कांच की शीशियों में आने वाली कोल्डड्रिंक्स कैन से बेहतर होती हैं। सवाल. एल्युमीनियम के बर्तन में खाना बनाते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जवाब. वैसे तो खाना बनाने या खाने के लिए एल्युमीनियम का किसी भी तरह से इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। फिर भी अगर आप एल्युमीनियम के बर्तन इस्तेमाल करते हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें- सवाल. जब एल्युमीनियम इतनी खतरनाक है तो इसके बर्तन का इस्तेमाल क्यों होता है? जवाब. सस्ता होने की वजह से एल्युमीनियम बर्तन बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। इसके अलावा ये धातु बहुत ज्यादा टिकाऊ होता है। इसी वजह से लोग एल्युमीनियम के बर्तनों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। मिश्रधातु (लोहा, तांबा जैसी 2 से ज्यादा धातुओं को मिलाना) के बर्तन एल्युमीनियम बर्तनों की तुलना में महंगे होते हैं। ये बर्तन जल्दी खराब हो जाते हैं। वहीं, एल्युमीनियम हाई प्रेशर झेल सकता है। कुकर के फटने की आशंका कम होती है। सवाल- कौन सी धातुएं खाना बनाने के लिए सुरक्षित हैं? जवाब- खाना बनाने के लिए लोहा सबसे अच्छा है। ये शरीर में आयरन की कमी दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा तांबा और पीतल की मिश्रधातु के बर्तन भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, स्टेनलेस स्टील सबसे सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प है। ———– ये खबर भी पढ़ें… नोएडा में फैक्ट्री कर्मचारियों ने क्यों बवाल मचाया?:4 दिन पहले हरियाणा में 35% सैलरी बढ़ी, UP के वर्कर्स की डिमांड क्या है? यूपी में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का इंडस्ट्रियल इलाका 13 अप्रैल को अचानक उबल उठा। 9 अप्रैल से जारी फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। गुस्साए कर्मचारियों ने 13 इलाकों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की। सवाल ये है कि आखिर हिंसा क्यों भड़की, इसका हरियाणा कनेक्शन क्या है? पूरी खबर पढ़िए…
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