गुना में मार्च महीने में हुए हवाला कांड में जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट IG को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में चार पुलिसकर्मियों का आचरण संदिग्ध पाया गया है। इसके बाद SP ने चारों पुलिसकर्मियों पर आरोप तय कर उन्हें आरोप पत्र सौंप दिए हैं। इस मामले में अब विभागीय जांच होगी। बता दें कि मामला 19 मार्च का है। जिले के धरनावदा थाने की रूठियाई चौकी अंतर्गत नेशनल हाईवे 46 पर रात 9:30 बजे पुलिस ने गुजरात की एक गाड़ी क्रमांक GJ 05 RK 9351 को वाहन चेकिंग के दौरान रोका। इस गाड़ी में एक करोड़ कैश था। पुलिसकर्मियों ने इस मामले में डीलिंग की और 20 लाख लेकर गाड़ी को छोड़ दिया। अगले दिन 20 मार्च को गुजरात के एक IPS का कॉल गुना पुलिस के पास आया, जिसके बाद पैसे लौटाए गए। 20 मार्च को वहीं गाड़ी पैसे लेने वापस गुना आई और पांच घंटे तक गुना में रही। मामला सामने आते ही 22 मार्च को ग्वालियर DIG अमित सांघी गुना पहुंचे और उन्होंने मामले की जांच की। शुरुआती तौर पर संदिग्ध भूमिका लगने पर धरनावदा थाना प्रभारी SI प्रभात कटारे, ASI साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन की भूमिका पूरे मामले में संदिग्ध मानते हुए चारों को सस्पेंड कर दिया गया। अगले दिन 23 मार्च को शासन ने गुना एसपी अंकित सोनी को हटा दिया। वहीं इस पूरे मामले की जांच ट्रेनी IPS आयुष जाखड़ को सौंपी गई थी। ट्रेनी IPS आयुष जाखड़ ने अपनी जांच रिपोर्ट ग्वालियर आईजी अरविंद सक्सेना को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में चार पुलिसकर्मियों का आचरण संदिग्ध पाया गया। इनके द्वारा न तो राेजनामचे में कोई एंट्री की गई और न ही गाड़ी रोकने और जांच के बाद छोड़ने की जानकारी किसी वरिष्ठ अधिकारी को दी गई। उस दौरान यह प्राइवेट व्यक्ति के संपर्क में रहे। जांच में इसे कदाचरण का मामला माना गया है।
SP ने दिए आरोप पत्र जांच रिपोर्ट के बाद IG के निर्देश पर गुना SP हितिका वासल ने चारों पुलिसकर्मियों पर आरोप तय कर दिए हैं। साथ ही उन्हें आरोप पत्र दिए गए हैं। SP ने बताया कि SDOP करैरा द्वारा जांच की गई थी, जिसके उपरांत मेरे द्वारा चार्जशीट इश्यू की गई है। इसमें कुछ जो चीजें जांच में सिद्ध पाई गई थीं, उसके उपरांत इसमें एमपी पुलिस रेगुलेशंस के अनुसार के अनुसार जो कार्रवाई होनी चाहिए, वो इसमें लगाया गया है। याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा इस कैश डील वाले मामले में जांच टीम ने नीरज जादौन के बयान भी दर्ज किए थे। नीरज ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उसे इंदौर के मानपुर से हिरासत में लिया और ग्वालियर के हजीरा थाने ले गई। वहां पर जांच अधिकारी आयुष जाखड़ और अन्य पुलिसकर्मियों ने मारपीट कर जबरन बयान लिखवाए। याचिका दायर होने के बाद हाई कोर्ट ने 20 अप्रैल को स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को हाई कोर्ट में इस पर बहस हुई। याची नीरज जादौन की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने पक्ष रखा। शासन की ओर से कहा गया कि याची द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए पहले ही गुना एडिशनल एसपी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। शासन ने कहा- कोई बयान रिकॉर्ड नहीं करना चाहते याचिकाकर्ता ने वकील की मौजूदगी में वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ बयान दर्ज करने की मांग रखी है। शासन की ओर से दी गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस याचिकाकर्ता के बयान रिकॉर्ड करने नहीं जा रही है। इसलिए यह याचिका का आधार नहीं बनता। वहीं मारपीट के आरोपों के संबंध में पहले ही जांच के लिए अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। स्टेटस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अब पुलिस को इस मामले में आगे नीरज के बयानों की जरूरत नहीं है।
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